बरेली। हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। यह दिन पर्यटन के महत्व को रेखांकित करने के साथ-साथ इस बात पर भी ध्यान केंद्रित करता है कि यात्रा किस तरह समाज, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों को प्रभावित करती है। पर्यटन केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का एक प्रमुख आधार है।
2025 की थीम – "Tourism and Sustainable Transformation"
संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) ने इस वर्ष की थीम “Tourism and Sustainable Transformation” (पर्यटन और सतत परिवर्तन) निर्धारित की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटन केवल कमाई तक सीमित न रहकर पर्यावरण-संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा हो। इसमें प्लास्टिक का कम उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा जैसे उपाय शामिल हैं।
स्थानीय संस्कृति और धरोहर को प्रोत्साहन
विशेषज्ञों का मानना है कि सतत पर्यटन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह स्थानीय समुदायों को सीधे लाभ पहुँचाता है। पर्यटन से न केवल हस्तशिल्प और संस्कृति को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों का संरक्षण भी संभव हो पाता है। स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान करना सतत पर्यटन की अहम कड़ी माना जा रहा है।
यात्री भी निभाएं अपनी जिम्मेदारी
यात्रा प्रेमियों और साहसिक पर्यटकों के लिए यह दिन याद दिलाता है कि वे जिम्मेदारी के साथ यात्रा करें। स्वच्छता बनाए रखना, स्थानीय उत्पादों का इस्तेमाल करना और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों से बचना ऐसे कदम हैं जो सतत परिवर्तन की दिशा में अहम भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यटन केवल आज का अनुभव नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कल की जिम्मेदारी भी है। यदि आज सतत और जिम्मेदार पर्यटन को अपनाया जाए, तभी भविष्य की यात्रा भी उतनी ही सुंदर और यादगार हो सकेगी।
लेखक- संजीव मेहरोत्रा, महामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन