अखण्ड आर्यावर्त निर्माण संघ ने प्रदेश के पुनर्गठन को बताया समय की आवश्यकता, छोटे राज्यों के बताए कई फायदे
जागरण टुडे कासगंज।
देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश को तीन हिस्सों में विभाजित कर नए राज्य बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इस मांग को लेकर अखण्ड आर्यावर्त निर्माण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेश शर्मा ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है।
क्यों उठी यह मांग?
ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तरप्रदेश का भौगोलिक क्षेत्रफल और जनसंख्या इतनी अधिक है कि एक ही राजधानी और प्रशासनिक व्यवस्था से प्रभावी संचालन अब संभव नहीं रह गया है। प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और कानून व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में लगातार पिछड़ रहा है।
संघ के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्र भौगोलिक, ऐतिहासिक और सामाजिक विविधताओं के चलते अलग-अलग समस्याओं से जूझ रहे हैं — कहीं गरीबी और पलायन, कहीं शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी, तो कहीं बेरोजगारी और अपराध की गंभीर समस्या।
छोटे राज्यों के फायदे गिनाए गए
ज्ञापन में छोटे राज्यों की मांग को जायज़ ठहराते हुए इसके कई फायदे गिनाए गए हैं।
सरकार की पहुँच आम जनता तक तेज़ी से हो सकेगी
प्रशासनिक सुगमता बढ़ेगी
योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगा
नई राजधानियों के निर्माण से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे
नए उद्योगों और संसाधनों का विकास युवाओं के लिए नए अवसर खोलेगा
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार प्रभावी ढंग से किया जा सके।
क्षेत्र: मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, बरेली, कासगंज, एटा सहित पश्चिमी और ब्रज क्षेत्र के जिले
राजधानी: मेरठ, नोएडा या आगरा
जनहित में ऐतिहासिक निर्णय की अपील
भूपेश शर्मा ने कहा कि वर्तमान स्थिति में उत्तरप्रदेश का संचालन प्रशासनिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत जटिल हो गया है। यदि राज्य का पुनर्गठन कर तीन नए राज्य बनाए जाएं, तो प्रत्येक क्षेत्र का समुचित और संतुलित विकास संभव हो पाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर जनहित में ठोस कदम उठाने की अपील की है।