Saturday, January 31, 2026

Bareilly News: बरेली में 2010 में हुए दंगों की निष्पक्ष जांच होना चाहिए: राजेश अग्रवाल

लेखक: Jagran Today | Category: उत्तर प्रदेश | Published: October 5, 2025

Bareilly News: बरेली में 2010 में हुए दंगों की निष्पक्ष जांच होना चाहिए: राजेश अग्रवाल
बरेली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि 1982 से बरेली की राजनीति में एक नया अध्याय तब जुड़ा, जब मौलाना तौकीर रजा ने राजनीतिक पटल पर सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की थी। यह वही परिवार है जिसे वर्षों तक समाज में एक पवित्र धार्मिक और सम्मानित परिवार के रूप में जाना जाता रहा।

तौकीर के बड़े बाबा साहब बरेलवी मसलक तौर पर पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। उनकी प्रतिष्ठा भारत सरकार ने स्वीकार की और डाक टिकट जारी किया। क्योंकि बड़े मियां बहुत विद्वान थे। उन्होंने धर्म और चिंतन पर पुस्तक लिखी। स्कालर्स ने उन पर पीएचडी भी की। सरकार और समाज में वह विशेष सम्मान का प्रतीक माने जाते थे। मगर राजनीति ने धीरे-धीरे इस परिवार के चरित्र को बदल दिया।

कांग्रेस ने उनके वालिद साहब को एमएलसी बनाकर राजनीति में प्रवेश किया। इसके बाद धर्म की आड़ लेकर मौलाना तौकीर ने धर्म के आधार पर समाज को बांटने की राजनीति शुरू की। मौलाना तौकीर स्वयं को मुसलमानों का मसीहा बताकर धर्म के नाम पर भीड़ को भड़काने का कार्य करने लगा। 

2010 में बरेली को जलाने की रची गई थी साजिश

भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेश अग्रवाल ने कहा कि साल 2010 में बरेली को दंगे की आग में झोंकने की एक सुनियोजित साजिश रची गई थी। कर्फ्यू के दौरान इस्लामिया इंटर कॉलेज में 20 से 25 हजार और आजाद इंटर कॉलेज में 10 से 12 हजार लोगों की भीड़ इकट्ठा की गई थी। योजना थी बरेली को रातों-रात फूंक देने की।

उन्होंने कहा की शहर की स्थिति भयावह थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने टेलीफोन तक बंद कर लिए थे। शहर में भय का वातावरण था, लेकिन मां काली की कृपा और समाज की सजकता से स्थिति बदली। क्षेत्र के लोधी समाज के युवाओं और महिलाओं ने एकजुट होकर बिना किसी हथियार बेलन, चकला और जो कुछ भी उपलब्ध था लेकर मोर्चा संभाला। मात्र आधे घंटे में 35-40 हजार लोग जिनमें 5-7 हजार महिलाएं शामिल थीं एकत्रित हो गए। उनकी एकजुटता के सामने उपद्रवियों को पीछे हटना पड़ा, और तभी प्रशासन भी सक्रिय हो गया।

न्यायिक आदेश और राजनीतिक दबाव

राजेश अग्रवाल का कहना है कि घटना के बाद राजनीतिक दबाव के कारण मामला वर्षों तक दबा रहा। बरेली के तत्कालीन एडीजे ने स्वत: संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करवाई, और तौकीर के विरुद्ध वाद आरंभ हुआ। राजनीति सक्रिय हुई और वाद अन्यंत्र स्थानांतरित कर दिया गया। फिर न्यायाधीश का तबादला चित्रकूट कर दिया गया।

तौकीर केवल एक मोहरा है असली चेहरे बेनकाब होने चाहिए

अभी तक प्रदेश सरकार द्वारा की गई कार्रवाई से ज्ञात होता है कि इस कांड के तार प्रदेश से तो जुड़े ही थे, देश और विदेश से भी जुड़े होने की प्रबल संभावना है। अतः प्रदेश सरकार इसकी गहनता से जांच करवा रही है। आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों का सहयोग लिया जाए तो निश्चित रूप से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, और वे चेहरे जो राजनीति की आड़ में व्यक्तिगत रोटियां सेंक रहे थे, उजागर होंगे।

समाज की एकजुटता हमारी असली ताकत है

राजेश अग्रवाल ने कहा कि 2010 की घटनाएं केवल अतीत की कहानी नहीं है, बल्कि वह इस बात का प्रमाण है कि जब समाज एकजुट होता है तो सबसे बड़ी साजिश भी असफल हो जाती हैं। आज आवश्यकता है सच्चाई को सामने लाने की। न्याय को सुनिश्चित करने और सामाजिक संवाद की रक्षा करने की। मां काली की कृपा और जनता की सजगता ने उस समय बरेली को बचाया था, और आज भी वही एकजुट हमारा सबसे बड़ा बल है।- (सोर्स टेलीग्राम संवाद अखबार)

No ads available.

Get In Touch

BDA COLONY HARUNAGLA, BISALPUR ROAD BAREILLY

+91 7017029201

sanjaysrivastav1972@gmail.com

Follow Us

© 2026 Jagran Today. All Rights Reserved.