हर साल 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस (World Post Day) मनाया जाता है। यह दिन 1874 में स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) की स्थापना की वर्षगांठ को चिह्नित करता है। 1969 में टोक्यो में हुई यूपीयू कांग्रेस ने इसे विश्व डाक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
2025 की थीम इस विचार पर केंद्रित है कि — “डाक सेवा स्थानीय स्तर पर लोगों की सेवा करते हुए, वैश्विक स्तर तक अपनी पहुँच बनाए रखे”। यानी, डाकघर केवल चिट्ठी भेजने का माध्यम नहीं बल्कि शहरों से लेकर सुदूर गाँवों तक लोगों को जोड़ने वाला पुल है।
भारतीय डाक सेवा की प्रमुख उपयोगिताएँ
1. संचार का माध्यम- ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में जहाँ इंटरनेट नहीं पहुँच पाया, वहाँ आज भी डाकघर लोगों के बीच संवाद का सेतु है।
2. आर्थिक सेवाएं- डाकघर बचत खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट, आरडी, पीपीएफ, सीनियर सिटीजन स्कीम जैसी योजनाएँ चलाता है। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के जरिए डिजिटल लेन-देन भी संभव है।
3. वित्तीय समावेशन- डाक सेवक गाँव-गाँव जाकर बैंकिंग सेवाएँ पहुँचाते हैं। करोड़ों ग्रामीणों के लिए यही सबसे भरोसेमंद बैंक है।
4. सामाजिक योगदान- पेंशन, मनरेगा मजदूरी और सरकारी योजनाओं की धनराशि सीधे डाकघर के माध्यम से लोगों तक पहुँचती है।
5. लॉजिस्टिक्स और पार्सल सेवा- ई-कॉमर्स कंपनियाँ जैसे Amazon और Flipkart भी स्पीड पोस्ट और पार्सल सेवाओं का उपयोग करती हैं। डाक विभाग सस्ती और विश्वसनीय डिलीवरी के जरिए ग्रामीण-शहरी भारत को जोड़ता है।
डाक टिकट (Postal Stamps) भारत की सांस्कृतिक विरासत और महान व्यक्तित्वों की झलक कराते हैं।
भारतीय डाक सेवा देश की संचार, बैंकिंग, बचत और सरकारी योजनाओं को आम नागरिक तक पहुंचाने का सबसे सुलभ और भरोसेमंद माध्यम है। - संजीव मेहरोत्रा, महामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन