- अभी तक धान खरीद शुरू नहीं, फिर भी सरकारी बोरियों में कैसे भर गया धान ?
- एसडीएम ने दिए जांच के निर्देश, किसानों में उबाल, भाकियू ने दी आंदोलन की चेताबनी
जनपद बरेली के मीरगंज तहसील कार्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित नथपुरा रोड पर संचालित सरकारी धान क्रय केंद्र पर एक बड़ा खेल सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि अभी तक सरकारी धान खरीद शुरू भी नहीं हुई, लेकिन केंद्र पर पहले से ही सरकारी मोहर लगी सैकड़ों बोरियों में धान भरा हुआ पाया गया। यह खुलाशा उस समय हुआ जब संबाददाता के द्वारा केंद्र पर सत्यता परखने के उददेश्य से औचक ऑपरेशन किया गया ।
*केंद्र पर खेल पकड़ा गया, पर जिम्मेदार मौन
केन्द्र प्रभारी गोविंद प्रसाद से जब इस बाबत सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, तौल अभी शुरू नहीं हुई है। मशीन की जांच चल रही है। लेकिन जब यह पूछा गया कि तो फिर सरकारी बोरियोंं में धान कहां से आया ? वह कोई संतोष जनक जबाब नहीं दे सके।
खरीद शुरू नहीं, फिर ये धान किसका ?
इस पूरे मामले ने धान खरीद प्रणाली की पारदर्शिता पर सबाल खड़े कर दिए हैं। आशंका जताई जा रही है बिचौलियों या निजी व्यपारियों का धान पहले से ही सरकारी बोरों में भरकर रख दिया गया, ताकि बाद में इसे समर्थन मूल्य पर बेंचकर भारी मुनाफा कमाया जा सके।
प्रशासन सक्रिय, एसडीएम ने दिए जांच के निर्देश
उपजिलाधिकारी मीरगंज आलोक कुमार ने कहा, "मामला गंभीर है, इसकी जानकारी मुझे नहीं थी, इस मामले की तत्काल जांच कराई जायेगी" और जांच में दोषी पाये जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लायी जायेगी।
किसानों में आक्रोश फूटा- हर साल यही घोटाला होता है
स्थानीय किसान यशपाल सिंह ने कहा कि हम कई दिनों से केंद्र खुलने का इंतजार कर रहे थे अब पता चला कि बिना सरकारी खरीद शुरू हुए ही धान गोदाम में भर गया, ये तो खुला किसानों के साथ धोखा है।
बता दें कि वर्तमान में बाजार में धान की कीमत 15 सौ से 1600 रूपये तक है। जबकि सरकारी समर्थन 2169 रूपये प्रति कुंतल है। ऐसे में सर कारी खदीद की आड़ में प्राइवेट धान को खपाकर लाखों का खेल खेलने की पूरा संभावना है।