बहेड़ी। ब्लॉक दमखोदा में लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक अजीब सा खेल चल रहा है। जहां एक ओर सरकारी अध्यापक मोटा वेतन पा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ते नज़र आ रहे हैं। इसका सीधा असर शिक्षा मित्रों पर पड़ रहा है, जिनसे न केवल अतिरिक्त कार्य कराया जा रहा है बल्कि कई बार उनकी ड्यूटी का दुरुपयोग भी किया जा रहा है।
हाल ही में सामने आए एक मामले में भाग संख्या 135 में नियुक्त एक अध्यापक ने अपनी ड्यूटी कटवाकर उसकी जगह एक महिला शिक्षा मित्र की ड्यूटी लगवा दी। जबकि अध्यापक महोदय को नियमित वेतन मिल रहा है, लेकिन बीएओ की ड्यूटी या अन्य प्रशासनिक कार्यों से दूरी बनाकर वे लोकल स्तर पर आराम फरमा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, ब्लॉक में यह कोई पहला मामला नहीं है। कई स्थानीय अध्यापक अपनी ड्यूटियां शिक्षा मित्रों पर थोप रहे हैं — विशेषकर महिला शिक्षा मित्रों को। इससे न केवल उनके साथ भेदभाव हो रहा है बल्कि शिक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ब्लॉक के जानकारों का कहना है कि “यह सिलसिला लगातार चल रहा है। जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। अध्यापक तनख्वाह तो पूरी ले रहे हैं लेकिन फील्ड ड्यूटी और प्रशासनिक कामों में अपनी भूमिका से बच रहे हैं।”
इस तरह की कार्यप्रणाली से शिक्षा मित्रों में असंतोष बढ़ रहा है। कई लोग चाहते हैं कि इस पर उच्च अधिकारियों द्वारा जांच कराई जाए ताकि इस तरह के खेल पर अंकुश लगाया जा सके।