राजधानी लखनऊ और शाहजहांपुर में आठ दिन के भीतर दो कैब चालकों की हत्या कर कार लूटने वाले गिरोह के सरगना व डेढ़ लाख रुपये के इनामी गुरुसेवक को पारा पुलिस ने रविवार रात लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस ने मौके से कारतूस, 38 बोर की पिस्टल, 32 बोर की रिवॉल्वर और शाहजहांपुर में लूटी गई कार समेत कई सामान बरामद किए।
रविवार सुबह पुलिस ने गिरोह के सदस्य विकास कनौजिया को दुबग्गा चौराहे से गिरफ्तार किया था। इससे पहले अजय सिंह को भी मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया था। डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि 10 अक्टूबर की रात किसान पथ के पास मुठभेड़ में अजय गिरफ्तार हुआ था, लेकिन गुरुसेवक अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला था। इस पर पुलिस आयुक्त ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया। बरेली रेंज डीआईजी ने भी 50 हजार रुपये का इनाम रखा था।
गुरुसेवक की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगाई गईं। रविवार देर रात सूचना मिली कि वह कार से हरदोई की ओर जा रहा है। पारा पुलिस और क्राइम टीम ने एक्सप्रेस-वे के जीरो प्वाइंट पर घेराबंदी की। रुकने के इशारे पर बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में गुरुसेवक मारा गया, जबकि उसका साथी भाग निकला।
गुरुसेवक ने 29 सितंबर को पारा से कैब बुक कर चालक योगेश पाल की हत्या कर शव सीतापुर में फेंक दिया था। छह अक्टूबर को उसने शाहजहांपुर के पुवायां से कैब बुक कर चालक अवनीश दीक्षित की हत्या कर कार लूट ली और शव बरेली-शाहजहांपुर मार्ग पर फेंक दिया। गुरुसेवक पर लूट व हत्या समेत आठ से अधिक मामले दर्ज थे।