ब्रजभूमि की सुरभि भरी फिजाओं में शास्त्रीय संगीत की मधुर लहरें गूंज उठीं, जब द्विदिवसीय ध्रुपद महोत्सव की अंतिम संध्या में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों ने मंच संभाला। दीपावली से पहले ‘होली धमार’ के गायन ने श्रोताओं को भक्ति और संगीत रस में सराबोर कर दिया।
पं. विदुर मलिक आनंद धाम संगीत सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित यह महोत्सव दिवंगत पं. विदुर मलिक की स्मृति को समर्पित था। कार्यक्रम का आयोजन वृंदावन शोध संस्थान के सभागार में हुआ, जहां दूसरे दिन का शुभारंभ आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी और आचार्य प्रथमेश लाल गोस्वामी ने ठा. बांकेबिहारी महाराज के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया।
संगीत की यह शाम रागों की रंगोली से सजी रही। पटना के ख्यात ध्रुपद गायक पं. विनोद कुमार मलिक ने राग भीम पलासी में अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया, जिस पर श्रोता तालियां बजाते नहीं थके। बनारस के सुरभार वादक देवव्रत मिश्रा ने राग पूरिया धनाश्री की मोहक प्रस्तुति दी, जिनका साथ वैभव रामदास ने पखावज पर दिया।
दरभंगा घराने के गायक डॉ. समित कुमार मलिक ने राग मुलतानी में धमार और सूल ताल की प्रस्तुति कर दर्शकों को पारंपरिक ध्रुपद शैली का अद्भुत अनुभव कराया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहे भोपाल के प्रसिद्ध गायक पं. उमाकांत गुंडेचा और अनंत गुंडेचा, जिन्होंने राग श्याम कल्याण में “आज ब्रज में उड़त गुलाल, गोपियन संग खेलें नंदलाल” और “बाजत बांसुरिया मधुर धुन” जैसी रचनाओं से वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। पखावज पर संगत अखिलेश गुंडेचा ने की।
कार्यक्रम के समापन पर आनंद मलिक, अमित मलिक और असित मलिक ने सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह, पटुका और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मुकेश कौशिक, रेवतीरमण, ब्रजभूषण गोस्वामी, डॉ. हरेकृष्ण शर्मा, योगेश शर्मा, शशिकांत शर्मा और सौरव सहित अनेक संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन मिलन गुप्ता ने किया।