बहेड़ी निवासी पत्रकार शाहिद अंसारी अपनी वाल्दा मुअज्ज़मा के साथ उमरा की मुकद्दस यात्रा के लिए रवाना हुए। घरवालों, दोस्तों और चाहने वालों ने दुआओं, अश्कों और मोहब्बत भरे लफ़्ज़ों के साथ उन्हें विदा किया।
इस दौरान कई उलमा-ए-कराम, समाजसेवी और इलाके के सम्मानित लोग भी मौजूद रहे, जिन्होंने शाहिद अंसारी और उनकी वाल्दा को दुआएँ देते हुए कहा कि “यह सफर बहुत खुशनसीब लोगों को नसीब होता है, अल्लाह उन्हें अपने हुक्म से बार-बार यह सआदत अता फरमाए।”
शाहिद अंसारी पहले भी अल्लाह के घर की ज़ियारत कर चुके हैं, और अब दूसरी बार रौज़ा-ए-रसूल और बैतुल्लाह शरीफ़ की हाजिरी का शरफ़ हासिल करने जा रहे हैं। रवाना होते वक़्त उनके घर का माहौल इमान और मोहब्बत की रौशनी से महका हुआ नज़र आया।
लोगों ने कहा कि शाहिद अंसारी एक नेकदिल, मिलनसार और रहनुमा शख्सियत हैं, जो अपने पेशे के साथ-साथ दीन, समाज और इंसानियत की खिदमत में हमेशा आगे रहते हैं। हर ज़ुबान पर यही दुआ थी “अल्लाह तआला शाहिद अंसारी और उनकी वाल्दा का यह सफ़र कुबूल फरमाए, उन्हें आसानियाँ अता करे, सलामती के साथ वापस लौटाए और उनकी दुआओं को मक़बूल फरमाए।”