उत्तर प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा केंद्र बनकर तेजी से उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रदेश सरकार ने कई नई नीतियां लागू की हैं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति-2025, स्टार्टअप नीति, डेटा सेंटर नीति, आईटी एवं आईटीईएस नीति-2022 और सेमीकंडक्टर नीति-2024 शामिल हैं।
इन नीतियों के अंतर्गत महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति, ट्रांसजेंडर और दिव्यांगजन के हितों को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। राज्य में माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, पेटीएम, एचसीएल, विप्रो, सैमसंग, एलजी और क्वालकॉम जैसी देश-विदेश की अग्रणी कंपनियों ने अपनी परियोजनाएं स्थापित की हैं या निर्माणाधीन हैं।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हब बन चुके हैं। यहां सैमसंग, हॉयर, वीवो और ओप्पो जैसी कंपनियों की इकाइयां स्थापित हैं। इसके साथ ही 100 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर भी तैयार किया जा रहा है।
आईटी और आईटीईएस क्षेत्र में प्रदेश का निर्यात 2015 में ₹15,000 करोड़ से बढ़कर 2024–25 में ₹75,000 करोड़ पार कर गया है। लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, बरेली और गोरखपुर जैसे टियर-2 शहरों में आईटी पार्क और एसटीपीआई केंद्र तेजी से विकसित हो रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जिससे निवेशकों को सुविधा और पारदर्शिता मिल रही है। इन प्रयासों से उत्तर प्रदेश देश का प्रमुख आईटी हब बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।