प्रयागराज, एजेंसी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में गुरुवार को बरेली बवाल से संबंधित मामले की सुनवाई हुई, लेकिन इस दिन कोई नया आदेश पारित नहीं किया गया। बरेली हिंसा मामले में हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव मो. यूसुफ अंसारी की ओर से अधिवक्ता सहर नक़वी और मो. आरिफ के माध्यम से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को इस अवधि में प्रगति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया, जिसमें गिरफ्तारियों की स्थिति, सबूतों का संकलन और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की विस्तार से जानकारी अपेक्षित है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगली सुनवाई तक जांच की प्रगति पर अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करना अनिवार्य होगा, जिससे जांच की दिशा का उचित मूल्यांकन किया जा सके। पुलिस और जिला प्रशासन को आदेश दिया गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखें और किसी प्रकार के राजनीतिक अथवा धार्मिक उकसावे से बचे रहें। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष से यह भी कहा कि सभी आरोपियों और गवाहों के बयान वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से सुरक्षित किए जाएं, जिससे प्रमाणिकता बनी रहे। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2025 को सुनिश्चित की गई है।
बता दें कि गत 26 सितंबर को बरेली में भड़की हिंसा के बाद नगर प्रशासन द्वारा अतिक्रमण विरोधी अभियान तेज कर दिए जाने के बाद निवासियों ने ''कानून प्रवर्तन के नाम पर स्थानीय संपत्तियों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने'' का आरोप लगाया है। बरेली नगर निगम ने हाल के हफ़्तों में सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण या अवैध निर्माण का हवाला देते हुए 70 से ज़्यादा संपत्तियां सील कर दी हैं।
30 सितंबर को नगर निगम ने व्यस्त नॉवेल्टी चौक इलाके के पास 68 दुकानों को यह दावा करते हुए सील कर दिया कि ये दुकानें सरकारी ज़मीन पर बनी हैं। इसके जवाब में सील की गई दुकानों पर मालिकाना हक जताने वाले 22 लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रभावित दुकानदारों में से एक, आरिफ हुसैन ने कहा कि ज़मीन वक्फ बोर्ड की है। इसके बावजूद नगर निगम ने शायद राजनीतिक दबाव में हमारी दुकानें सील कर दीं।
मौजूदा याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि प्रभावितों को मुआवजा दिया जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मामले की अगली सुनवाई फिलहाल तय नहीं की गई है, लेकिन मामले में कोर्ट की सक्रियता और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब की संभावना बनी हुई है।
मालूम हो कि यह विवाद 06 सितंबर को कानपुर में निकाले गए ‘जुलूस-ए-मोहम्मदी’ से जुड़ा है। इसमें ‘आई लव मुहम्मद’ लिखे पोस्टर लेकर लोग शामिल हुए थे। इसके बाद 26 सितंबर को बरेली में आईएमसी (इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। जुमे की नमाज के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े।
बवाल के बाद में शहर के पांच थानों में 10 मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनमें मौलाना तौकीर रजा को भी आरोपी बनाया गया। इसके बाद पुलिस ने 105 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया और दो स्थानों पर बुलडोजर कार्रवाई की, जिसमें आईएमसी प्रवक्ता नफीस का मैरिज हॉल भी ध्वस्त किया गया।