Friday, January 30, 2026

Bareilly News: महिला को पति पर केस करना पड़ा महंगा, फैमिली कोर्ट ने लगाया 10 हजार रुपये का जुर्माना

लेखक: Jagran Today | Category: उत्तर प्रदेश | Published: October 17, 2025

 Bareilly News: महिला को पति पर केस करना पड़ा महंगा, फैमिली कोर्ट ने लगाया 10 हजार रुपये का जुर्माना

एक युवती को पति के खिलाफ केस करना महंगा पड़ गया। अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय तृतीय ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी ने पति पर झूठे आरोप लगाकर भरण पोषण की रकम के लिए मुकदमा दायर करने वाली पत्नी का केस खारिज कर पत्नी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है, जो पति को बतौर मुआवजा दिया जाएगा। कोर्ट ने इस बारे में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायिक कार्यवाही के जरिये किसी बेटे को उसके माता-पिता से अलग करने के लिए बाध्य करना अन्याय पूर्ण होगा।

माधोबाड़ी में रहने वाली युवती की सात साल पहले मुरादाबाद के युवक से हुई थी शादी

नई बस्ती माधोबाड़ी निवासी बन्टी ने मुरादाबाद थाना कटघर निवासी पति ब्रजेश के विरुद्ध वर्ष 2020 में फैमिली कोर्ट में केस दायर कर उल्लेखित किया था कि 15 दिसंबर 2018 को ब्रजेश के साथ माता-पिता ने शादी की थी और 11 लाख रुपये खर्च किए थे। ससुरालीजन 15 लाख रुपये नगद की मांग करते हुए प्रताड़ित करते थे। 29 अक्टूबर 2019 को घर से धक्के मारकर निकाल दिया।

वहीं, पति ने कोर्ट में जवाब दिया कि विवाह दहेज रहित था। बंटी को अपनी शिक्षा पर अहंकार है। आये दिन नये वस्त्र और आभूषण की मांग करती थी। बाहर होटल में खाना खाने की जिद करती थी। रोजाना क्लेश करती थी, झूठे केस में फंसा देने की धमकियां देती थी। जब उसके इस व्यवहार की शिकायत पिता से की तो उल्टा उन्होंने भी धमकाया। बंटी के माता-पिता ने कहा कि तुम लोग बरेली आकर रहो। विचारण के दौरान जिरह में वादिनी के पिता ने स्वीकार किया कि ब्रजेश अपने मां-बाप को छोड़कर अलग रहेगा तो बंटी जाने के बारे में सोच सकती है, स्वेच्छा से अपने पिता के साथ मायके में रह रही है। उसे पति से भरण पोषण चाहिए, लेकिन पति के साथ नहीं रहेगी।

अदालत ने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए उल्लेखित किया कि न्यायिक कार्यवाही के माध्यम से किसी पुत्र को उसके माता-पिता से अलग करने के लिए बाध्य किया जाना घोर अन्यायपूर्ण होगा। वादिनी और उसके पिता के कथन से उनकी दूषित सोच, संस्कार व परिवेश ही दिखाई देता है, जिसमें वैवाहिक संस्कार का कोई मूल्य नहीं है। वादिनी उच्च शिक्षा प्राप्त है, लेकिन उसके कथन से बड़े बुजुर्गों के प्रति उपेक्षाभाव के साथ संयुक्त परिवार के प्रति घोर नकारात्मक भाव विद्यमान है तथा उसकी शिक्षा संस्कार से विहीन ही दिखाई देती है। 

वादिनी के तीन सगे भाई हैं, कोई आश्चर्य नहीं है भविष्य में भाइयों के विवाह की स्थिति में उनकी पत्नियां भी ऐसी ही सोच की रहें। माता-पिता से अलग रहने का दबाव बनाने के लिए मिथ्या आधारों पर इसी तरह केस दायर करें। यह स्थिति सामाजिक परिवेश में अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है।

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