हर साल 17 अक्टूबर को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य गरीबी के खिलाफ वैश्विक एकजुटता और गरीबों के अधिकारों की रक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है।
इस दिवस की शुरुआत 17 अक्टूबर 1987 को हुई थी, जब पेरिस के ट्रोकाडेरो में एक लाख से अधिक लोग एकत्र हुए थे, उसी स्थान पर जहां 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए थे। उस दिन लोगों ने अत्यधिक गरीबी, हिंसा और भूख के शिकार लोगों को श्रद्धांजलि दी और यह संकल्प लिया कि गरीबी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ी जाएगी।
वर्ष 2025 की थीम है
“सामाजिक और संस्थागत दुर्व्यवहार का अंत: गरीबी में जीवन यापन कर रहे परिवारों के प्रति सम्मान और प्रभावी सहयोग सुनिश्चित करना।”
यह थीम इस बात पर जोर देती है कि गरीबी केवल धन की कमी नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव और संस्थागत असमानता का परिणाम भी है। समाज के हर वर्ग को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि गरीब परिवारों को समान अवसर, सम्मान और सहयोग मिले।
इस अवसर पर बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा का कहना है कि “गरीबी उन्मूलन केवल आर्थिक सुधारों से नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसरों से संभव है। जब तक समाज गरीबों को सम्मान और आत्मनिर्भरता का अवसर नहीं देगा, तब तक वास्तविक विकास अधूरा रहेगा।”
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे गरीबों की मदद को केवल दान तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें शिक्षा, रोजगार और सम्मान से जोड़ने का प्रयास करें। अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस हमें यह याद दिलाता है कि एक समानता-आधारित, न्यायपूर्ण और मानवीय समाज ही सच्चे विकास की पहचान है।