कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा बुधवार 22 अक्टूबर को श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में पारंपरिक अन्नकूट-छप्पनभोग महोत्सव श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। गोवर्धन पूजा के दिन प्रातःकाल से ही पूरा परिसर भगवान श्रीकृष्ण और श्री गिरिराजजी की भक्ति में रंगा नजर आया।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर को विद्युत सजावट से सजाया गया, वहीं ठाकुरजी के बंगले में पुष्पों और पत्तियों से सुसज्जित आकर्षक झांकियां बनाई गईं। भागवत भवन में स्थित श्री राधा-कृष्ण और श्रीकेशवदेव मंदिर प्रांगण में स्थापित श्री गिरिराजजी को 56 प्रकार के दिव्य व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। ठाकुरजी दिव्य छप्पनभोग के मध्य विराजमान होकर भक्तों पर कृपा की वर्षा कर रहे थे।
भव्य पुष्प-बंगले के मध्य ठाकुरजी का अलौकिक श्रृंगार और पोशाक भक्तों के आकर्षण का केंद्र रही। यह दृश्य द्वापर युग की भोग अर्पण परंपरा की झलक प्रस्तुत कर रहा था। ठाकुरजी की ऐसी मनोहारी झांकी देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
सुबह श्रीगिरिराजजी का पंचगव्य से पूजाचार्यों द्वारा अभिषेक किया गया, जिसके बाद श्रीकृष्ण संकीर्तन मंडल के रसिक भक्तों ने भक्ति गीतों और भजनों से वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। संकीर्तन उपरांत भक्तों को अन्नकूट प्रसाद का वृहद वितरण किया गया।
प्रसाद और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लम्बी कतारें जन्मस्थान परिसर और प्रवेश द्वारों तक लगी रहीं। ठाकुरजी का प्रसाद प्राप्त कर भक्तों ने स्वयं को धन्य महसूस किया और “जय श्रीगिरिराज जी महाराज” तथा “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
पूरे आयोजन को सफल बनाने में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारी और कर्मचारी पूरी निष्ठा से जुटे रहे। अन्नकूट महोत्सव का यह दिव्य आयोजन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम बन गया।