प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए आरआरसी केंद्र (रिसोर्स रिकवरी सेंटर) अब बदहाली के कगार पर हैं। लेकिन उनके संचालन का कार्य अभी अधर में लटका हुआ है। जनपद बरेली के मीरगंज विकास खंड फिरोजपुर और धंतिया गांवों में बने ये केंद्र आज खंडहर होने की हालत में दिखाई देने लगे हैं।
गांव फिरोजपुर मेंं आरआरसी केंद्र, जिसकी लागत तकरीबन 8 लाख रूपये बताई जाती है, और इस सेंटर का निर्माण विगत वर्ष 2023 में हुआ, लेकिन आज तक इस केंद्र पर गेट (दरबाजा) तक नहीं लगाया जा सका है। दीवारें दरक रही हैं, भवन अंदर से खंडहर का रूप धारण कर चुका है और पूरे परिसर में झाड़ियां उगी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के बाद से इस केंद्र का कभी सदुपयोग नहीं हुआ है।
इसी तरह गांव धंतिया में तकरीबन 6 लाख 45 हजार रूपये की सरकारी लागत बनाया गया आरआरसी सेंटर भी जर्जर स्थिति में है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण ऐजेंसी को पूरा भुगतान किया जा चुका है, जबकि काम अभी अधूरा है। और घटिया सामग्री प्रयुक्त कर बना दिया गया।
इस तरह से मीरगंज विकास खंड क्षेत्र में तमाम ऐसे आरआरसी केंद्र सफेद हाथी के समान खड़े हुए दिखाई तो दे रहे हैं, लेकिन चालू एक भी केंद्र नहीं किया जा सका है। यह सब मामला पड़ताल किए जाने पर उजागर हुआ है।
क्या कहते हैं खंड विकास अधिकारी मीरगंज
इस मामले में पूछे जाने पर खंड विकास अधिकारी आनन्द विजय यादव ने बताया कि सभी गांवों पर तैनात सचिवों को क्षतिग्रस्त हुए आरआरसी केद्रों के दुरस्तीकरण हेतु निर्देशित किया जा चुका है। और एक सप्ताह के भीतर सभी केंद्र चालू कर दिए जायेंगे। इसी कारण सभी सचिवों का अक्टूवर माह का वेतन बाधित किया जा चुका है।
ग्रामीण एवं समाजसेवी रामेंद्र सिंह, भगवान सिंह, यशपाल सिंह यादव, और मुस्तफा अली समेत तमाम लोगों का कहना है कि जब तक ये केंद्र चालू नहीं होगें, स्वच्छ भारत मिशन का असल उददेश्य अधर में लटका रहेगा।