जनपद कासगंज के पटियाली क्षेत्र में स्थित सावित्री हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद हुई करीना की मौत को 38 दिन बीत चुके हैं। मगर साठगांठ के चलते अभी तक इस मामले में दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। जबकि मृतका के परिजन न्याय की गुहार लगाते हुए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश में हैं।
यह घटना 22 सितंबर की है। थाना सिकंदरपुर वैश्य क्षेत्र के गांव नकारा निवासी योगेश कुमार की पत्नी करीना को प्रसव पीड़ा होने पर परिवारीजन सावित्री हॉस्पिटल ले गए। जहां ऑपरेशन के बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि नवजात बच्चा स्वस्थ है। परिजनों का आरोप है कि करीना का ऑपरेशन किसी योग्य डॉक्टर ने नहीं, बल्कि एक टेक्नीशियन ने किया था, जिसका वीडियो अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे में कैद है। सावित्री की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया था।
हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सावित्री हॉस्पिटल सील कर दिया था। सूत्र बताते हैं कि जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल का पंजीकरण अवैध तरीके से कराया गया था। रजिस्ट्रेशन के लिए अलीगढ़ निवासी डॉ. फैज के दस्तावेज चोरी करके उपयोग किए गए थे। डॉ. फैज ने साफ कहा था, “मैंने कभी कासगंज नहीं देखा, मेरे दस्तावेज वहां कैसे पहुंचे, यह जांच का विषय है।”
करीना की मौत से आहत पति योगेश ने अस्पताल में आत्महत्या का प्रयास किया था, जबकि उसकी ननद को सदमे में अटैक पड़ा। परिजनों का आरोप है कि सिकंदरपुर के थाना प्रभारी ने तहरीर लेने के बाद अस्पताल संचालक से सांठगांठ कर ली। यही कारण है कि अभी तक आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
सूत्रों के मुताबिक, यह अस्पताल भाजयुमो के एक नेता के संरक्षण में चल रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से पूरा मामला दबाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना सत्यापन के डॉ. फैज के नाम पर अस्पताल का पंजीकरण कैसे हुआ? सीएमओ कार्यालय की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पोस्टमार्टम के 28 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट लंबित है, जिससे परिजनों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।