Friday, January 30, 2026

KASGANJ News चार साल बाद भी अधूरा सपना — विकास की बाट जोहती तीर्थनगरी सोरों सुकरक्षेत्र!

लेखक: Guddu Yadav | Category: उत्तर प्रदेश | Published: October 28, 2025

KASGANJ News चार साल बाद भी अधूरा सपना — विकास की बाट जोहती तीर्थनगरी सोरों सुकरक्षेत्र!


सरकार की घोषणाएँ रहीं कागज़ों तक, श्रद्धालु अब भी सुविधाओं के मोहताज — जनता बोली, “अब चाहिए काम, न कि बयान”



जागरण टुडे,सोरों/कासगंज

भगवान वराह की पावन धरती और गंगा के पवित्र तट पर बसी तीर्थनगरी सोरों सुकरक्षेत्र आज भी अपने विकास के इंतज़ार में है। चार साल पहले प्रदेश सरकार ने इसे “तीर्थ स्थल” घोषित किया था, लेकिन जमीनी हालात अब भी पुराने ही हैं। घाटों पर टूटी सीढ़ियाँ, सड़कों पर गड्ढे और सफाई व्यवस्था बदहाल है।


28 अक्टूबर 2021 को भूपेश कुमार शर्मा के नेतृत्व में हुए आमरण अनशन के बाद सरकार ने झुककर सोरों को तीर्थस्थल घोषित किया था। उस समय यह घोषणा सोरों के कायाकल्प की उम्मीद लेकर आई थी, लेकिन चार साल बाद भी विकास का दीपक नहीं जला।


तीर्थ दर्जा मिलने के बाद यहाँ होना चाहिए था — घाटों का सौंदर्यीकरण, वराह मंदिर कॉरिडोर, तीर्थ परिक्रमा मार्ग, पार्किंग, विश्राम गृह, शौचालय और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी मूलभूत सुविधाएँ। पर आज भी श्रद्धालु गंगा स्नान को पहुँचने में कठिनाई झेल रहे हैं। नगर की गलियों में जलभराव, जाम नालियाँ और झूलती तारें अब भी आम नज़ारा हैं।


मुख्यमंत्री कार्यालय का ट्वीट — “जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने सोरों सुकर क्षेत्र को तीर्थस्थल घोषित किया है।” — उस समय आशा की किरण बना था, मगर योजनाएँ अब भी फाइलों में धूल फांक रही हैं।


स्थानीय नागरिकों ने कहा, “तीर्थ का दर्जा सम्मान था, लेकिन बिना विकास यह अधूरा है। हमें फोटो नहीं, प्रोजेक्ट चाहिए।”

भूपेश कुमार शर्मा ने कहा, “सोरों का संघर्ष पहचान और प्रगति के लिए था, सिर्फ नाम के लिए नहीं। यदि सरकार ने काम नहीं किया, तो हम फिर आंदोलन करेंगे।”


यदि सरकार ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो सोरों का तीर्थस्थल दर्जा सिर्फ एक राजनीतिक घोषणा बनकर रह जाएगा।

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