जागरण टुडे, बरेली। आईआईआईटी इलाहाबाद, प्रयागराज की ओर से आयोजित “साइबर सुरक्षा जागरूकता दिवस” के अवसर पर अपर पुलिस महानिदेशक, बरेली ज़ोन, रमित शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में ऑनलाइन प्रतिभाग किया। उन्होंने तेजी से बदलते साइबर अपराध के स्वरूप और उससे निपटने के प्रभावी उपायों के बारे में बताया।
एडीजी रमित शर्मा ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट (डिजिटल अरेस्ट) आज के समय का सबसे खतरनाक साइबर अपराध बन चुका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं और उनसे ऑनलाइन भुगतान कराते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को ऐसे किसी भी कॉल या लिंक से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने साइबर स्लेवरी (Cyber Slavery) की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई, जिसमें युवाओं को फर्जी नौकरियों का लालच देकर ऑनलाइन ठगी, जालसाजी या अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसी वेबसाइटों और सोशल मीडिया ऑफ़रों से सतर्क रहना चाहिए, जो अत्यधिक आकर्षक या असंभव लाभ देने का दावा करती हों।
एडीजी ने पुलिस रेस्पॉन्स मैकेनिज़्म (Police Response Mechanism) की भूमिका पर भी चर्चा की। बताया कि साइबर अपराध की शिकायतों पर पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया नागरिकों के सहयोग पर निर्भर करती है। आमजन को cybercrime.gov.in पोर्टल या 1930 हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत शिकायत दर्ज करना चाहिए। एडीजी ने लीगल फ्रेमवर्क (Legal Framework) से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। कहा साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस, तकनीकी एजेंसियों और नागरिकों के बीच तालमेल अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, फैकल्टी मेंबर्स और आईटी प्रोफेशनल्स ने भाग लिया। सत्र के अंत में एडीजी रमित शर्मा ने सभी प्रतिभागियों से सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने और दूसरों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।