जागरण टुडे, बरेली। हर वर्ष 30 अक्टूबर को भारत और इसके अगले दिन 31 को विश्वभर में विश्व बचत दिवस (World Savings Day) या मितव्ययिता दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य लोगों में बचत और वित्तीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि आज की समझदारी भरी बचत, कल के सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव रखती है।
बचत का अर्थ केवल पैसे को संभालकर रखना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी आदत है जो भविष्य में आने वाली अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने की तैयारी कराती है। जीवन में कई बार अचानक आर्थिक संकट या आपातकालीन स्थिति आ सकती है। ऐसे में बचत काम आती है। यह न सिर्फ आर्थिक स्थिरता देती है, बल्कि आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है।
बचत और निवेश में अंतर समझना भी बेहद जरूरी है। बचत आमतौर पर कम जोखिम वाली होती है और इसे तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं निवेश में कुछ जोखिम तो होता है, लेकिन इससे अधिक मुनाफा भी मिल सकता है। इसलिए, संतुलित वित्तीय योजना बनाते समय दोनों के बीच सही तालमेल रखना जरूरी है।
बचत दीर्घकालिक लक्ष्यों की पूर्ति में भी मदद करती है, जैसे घर खरीदना, बच्चों की शिक्षा, या रिटायरमेंट के बाद का जीवन। नियमित बचत करने से व्यक्ति भविष्य की जरूरतों के लिए मानसिक रूप से भी सुरक्षित महसूस करता है।
आज के दिन हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखेंगे और अपनी आय का एक हिस्सा नियमित रूप से बचाएंगे। साथ ही, अपने आसपास के लोगों को भी बचत के महत्व के बारे में जागरूक करेंगे। क्योंकि एक सुरक्षित और समृद्ध समाज की नींव जिम्मेदार नागरिकों की बचत से ही मजबूत होती है।