जागरण टुडे, मथुरा। गोपाष्टमी, यानी वह पावन दिन जब यशोदानंदन भगवान श्रीकृष्ण ने प्रथम गौचारण के लिए प्रस्थान किया था। इसी पावन अवसर पर गुरुवार 30 अक्टूबर को श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में विराजमान ठाकुर श्री केशवदेवजी के गोप स्वरूप में दर्शन हुए।
गोपाष्टमी पर मंदिर प्रांगण गौचारण-अभ्यारण्य के रूप में सुसज्जित दिखाई दिया। यमुना पुलिन की पृष्ठभूमि में गऊओं के साथ लकुटी लिए ग्वालबालों संग बालकृष्ण का स्वरूप और वृक्षावलियों की सजावट ने द्वापर युग के उस दिव्य दृश्य को सजीव कर दिया। प्रातः से ही भक्तों की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी और देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
इसी क्रम में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा परिसर में स्थित गौशाला में गौपूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दोपहर 12 बजे आरंभ हुआ यह पूजन कार्यक्रम अपराह्न तक चलता रहा। गौशाला परिसर को गोबर से लीपकर शुद्ध किया गया, इसके बाद गऊओं को स्नान कराया गया। उनके सींगों पर सुगंधित तेल का लेपन, मेंहदी से अलंकरण और श्रृंगार कर पूजा की गई।
गौमाता का पूजन संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी द्वारा वैदिक विधि से किया गया। पूजन उपरांत गऊओं और बछड़ों को चने की दाल और गुड़ का भोग लगाया गया। साथ ही सभी गौसेवकों को वस्त्रादि भेंट किए गए। उन्होंने कहा कि गोपाष्टमी वह दिन है जब भगवान श्रीकृष्ण ने पहली बार गौचारण किया, इसलिए यह ब्रजभूमि का गौ-महोत्सव है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ब्रजवासी को इस दिन एक गाय की रक्षा व पालन का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने भारत सरकार से देशभर में गौवंश की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अपील की। गोपाष्टमी पर्व पर गौपूजन कार्यक्रम में संस्थान के अधिकारी, पूजाचार्य, गौपालक और अन्य कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।