जागरण टुडे, बरेली। कमीशन के चक्कर में तमाम आशा वर्कर गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों में ले जा रही हैं। इसकी शिकायतें लगातार शासन और प्रशासन तक पहुंच रही हैं। डीएम अविनश सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। बृहस्पतिवार को जिला स्वास्थ्य समिति की मासिक बैठक में डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया कि गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों में ले जाने वाले आशा वर्कर की सेवा समाप्त कर दी जाए।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में डीएम ने ई-संजीवनी पोर्टल पर डॉक्टरों द्वारा की जा रही दैनिक ओपीडी की समीक्षा की। इस पर दलेलनगर, मझगंवा, फरीदपुर और नवाबगंज की स्थिति खराब पाई गई, जिस पर डीएम ने संबंधित एमओआईसी को स्थिति सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने नियमित टीकाकरण में संतनगर, जसोली, बहेड़ी और कालीबाड़ी स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा अधिकारियों को स्थिति ठीक करने के निर्देश दिए। कहा कि अधिकारी टीकाकरण में लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति सुनिश्चित करें। अधिकारियों को एक टीम बनाकर फील्ड में जाकर संवाद स्थापित कर टीकाकरण को पूर्ण करने के निर्देश दिए।
बच्चों का टीकारण न कराने वाले परिवारों को दिसंबर में नहीं मिलेगा राशन
जननी सुरक्षा योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने सभी चिकित्सा अधिकारियों को खराब काम करने वाली आशाओं और निजी अस्पतालों में डिलीवरी के लिए गर्भवतियों को ले जाने वाली आशाओं को चिह्नित कर त्वरित कार्रवाई कर सेवा समाप्ति के निर्देश दिए। डीएम ने निर्देश दिए गए कि जो परिवार नवंबर में बच्चों का नियोजित टीकाकरण पूर्ण नहीं कते हैं तो उनका दिसंबर माह का पूर्ति विभाग द्वारा दिया जाने वाला राशन रोका जाए। डीएम ने निर्देश दिया कि वैक्सीन न लगवाने वाले परिवारों को जागरूक करने और भ्रान्तियां कम करने के लिए पूर्ति विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आपसी तालमेल के साथ कार्य करें।
बैठक में राष्ट्रीय बैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, आशा भुक्तान, आभा आईडी, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण कार्यक्रम, आरसीएच पोर्टल पर डेटा फीडिंग सम्बन्धी, राष्ट्रीय टीबी रोग नियंत्रण कार्यक्रम, सर्जन परफॉर्मेंस, परिवार कल्याण कार्यक्रम सहित अन्य कार्यक्रमों और योजनाओं की प्रगति सम्बन्धित समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी देवयानी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विश्राम सिंह, समस्त एमओआईसी आदि अधिकारी उपस्थित रहे।