जागरण टुडे, बरेली। ऑनलाइन हाजिरी को लेकर शिक्षक संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा। गुरुवार देर शाम सैकड़ों शिक्षक बीएसए ऑफिस पहुंचे और वहां जमकर नारेबाजी की। शिक्षकों का कहना था कि शत प्रतिशत उपस्थिति न देने पर बीएसए ने 29 अक्टूबर को पत्र जारी कर सभी शिक्षकों का वेतन रोकने की बात कही। जबकि ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क और बच्चों की उपस्थिति दोनों बड़ी चुनौती हैं। शिक्षक बीएसए को बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
बीएसए के न होने पर खंड शिक्षा अधिकारी दिनेश चंद्र जोशी पहुंचे, लेकिन नतीजा शून्य रहा। शिक्षकों ने वहीं बैठकर धरने का ऐलान कर दिया। कुछ देर बाद बीएसए वहां पहुंचे और शिक्षकों का पांच नवंबर तक वेतन जारी करने की बात कही, तब जाकर धरना समाप्त किया गया।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नरेश गंगवार का कहना है कि गांव के बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं आते। कई बार तो घर-घर बुलाने के बावजूद बच्चे पढ़ाई के लिए नहीं पहुंचते। शादियों या त्योहारों के समय तो कई दिन तक बच्चे स्कूल से गायब रहते हैं। ऐसे में 95 प्रतिशित ऑनलाइन हाजिरी देना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि विभाग हमसे बच्चों की हाजिरी का जिम्मा मांग रहा है, जबकि असल में समस्या जमीनी है।
यूटा जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार ने शिक्षक और स्कूल को प्रयोगशाला बना दिया है, जिससे शिक्षक परेशान हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के महामंत्री सुनील शर्मा ने कहा कि शिक्षकों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। महिला शिक्षक संघ की महामंत्री राखी सक्सेना ने कहा कि इस सत्र में पढ़ाई से ज्यादा ऑनलाइन व्यवस्था पर जोर है। सीएल चौधरी ने कहा कि बात बात पर वेतन रोकने की धमकी से तमाम शिक्षक दिल के मरीज हो गए हैं। शिखा अग्रवाल ने कहा कि वेतन हमारे परिवार का है जिसे कोई भी न रोक सकता और न ही किसी भी जनपद में रुका है।
इस दौरान केसी पटेल, योगेश गंगवार, प्रेमपाल गंगवार, हरीश गंगवार, सूरज गंगवार, गिरवर सिंह, अनिल कुमार, रूपेंद्र राठौर, विजेंद्र सिंह, प्रियंका भास्कर, सुधा देवी, तरण जीत, अन्न पूर्णा, विजेन्दर गुर्जर आदि शिक्षक सम्मिलित रहे। धरने का संचालन तपन सिंह मौर्य ने किया।
बीएसए संजय सिंह ने बताया कि यूपी के कई जिलों में स्थिति काफी बेहतर है, लेकिन बरेली जिले की रिपोर्ट कमजोर है। उन्होंने कहा कि अब अगले महीने से ऑनलाइन अटेंडेंस की जानकारी सीधे सीएम डैशबोर्ड पर भेजी जाएगी, इसलिए सभी शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी होगी।
शिक्षकों का वेतन रोकना न्यायोचित नहीं
बरेली। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने भी वेतन रोकने पर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद बीएसए को ज्ञापन सौंपा। संगठन मंत्री सत्यार्थ पाराशरी ने कहा कि महासंघ शैक्षिक नवाचार का समर्थन करता है पर उसमें आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को बिना संज्ञान लिए ऐसे वेतन अवरुद्ध करना न्यायोचित नहीं है। जिला कोषाध्यक्ष परीक्षित गंगवार ने बताया कि संगठन के प्रांतीय नेतृत्व की ओर से महानिदेशक को लिखे पत्र में विशेषज्ञ समिति के निर्णय आने तक उपस्थिति यथावत रखने का आग्रह किया गया है।
जिला उपाध्यक्ष पारुल चंद्रा ने कहा कि वेतन हमारा सम्मान है और सुरक्षा है। विभागीय कार्यों को लेकर आए दिन वेतन अवरुद्ध करने का आदेश करना शिक्षकों की मानसिक प्रताड़ना है। जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष शरद दीक्षित, जिला मंत्री शिखा अग्रवाल, ब्लॉक अध्यक्ष आलमपुर जाफराबाद राजेंद्र प्रसाद तिवारी, भुता अवनीश गंगवार, सत्यपाल सिंह, दीपक कुमार, राजपाल गंगवार, हरविंद्र सिंह, शालिनी, अंजू समेत सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे।