उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी डॉ. विक्रम सिंह ने जिला जज रवि कुमार दिवाकर की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठाए हैं। पूर्व डीजीपी ने कहा है बनारस के ज्ञानवापी प्रकरण में जज रवि कुमार दिवाकर ने ऐतिहासिक व्यवस्था दी, जिस पर उनकी सर्वत्र तारीफ हो रही है। बरेली में तैनाती के दौरान जज रवि कुमार दिवाकर ने 2010 में हुए दंगे में तौकीर रजा खान को पूरी तरह जिम्मेदार और दोषी ठहराया। पूर्व डीजीपी ने कहा कि ज्ञावापी प्रकरण के बाद जज रवि कुमार दिवाकर को इस्लामिक मूवमेंट की ओर से धमकियां दी गईं। इस पर जज रवि कुमार दिवाकर ने यूपी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम को चिट्ठी लिखकर धमकियां मिलने की विस्तरित जानकारी दी। बावजूद इसके जज साहब की सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई। यही नहीं, उनका गनर कई-कई दिन की छुट्टी पर चला जाता है। शिकायत करने पर उसके खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की गई।
दरसअसल, पूर्व डीजीपी डॉ. विक्रम सिंह की ओर से एक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि जिला जज रवि कुमार दिवाकर बड़े ही यशस्वी जज हैं। बनारस के ज्ञापवापी प्रकरण में जब श्रंगार गौरी का मामला चला था, और जब यह दरख्वास्त पड़ी थी कि श्रंगार गौरी की पूजा की अनुमति दी जाए। वहां जो मूर्तियां हैं उनकी सुरक्षा की जाए। रविकुमार दिवाकर ने जब यह जजमेंट दिया तो उन्हें धमकियां आना शुरू हो गईं। इसके बाद जब यह पता चला कि वहां बुजूखाने में शिवलिंग है, तब उन्होंने कहा था कि इसको सील कर दिया जाय, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी।
ज्ञापवापी पर फैसला सुनाने के बाद जज साहब को धमकियां आने लगीं। धमकियां दो चैनल से मिलीं, एक वायस इंटरनेशनल प्रोटोकॉल और दूसरा इस्लामिक मूवमेंट से रजिस्टर्ड लेटर मिला। यह मई 2022 की बात है। इसके बाद 20 जून को जज रवि कुमार दिवाकर का तबादला बरेली हो गया। वहां भी जज साहब को उसी तरीके से दो बार धमकियां मिलीं। पूर्व डीजीपी के मुताबिक भोपाल वाले अदनान ने अपना नाम बसेत खिलजी रख लिया। बसेत खिलजी के नाम से उसने इंस्टाग्राम पर एकाउंट बना रखा था, जिससे जज साहब को धमकियां आईं। जज साहब का कहना है कि दोनों की भाषा एक जैसी है।
जस्टिस रवि कुमार दिवकार की फोटो इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर फद्दी-फद्दी गालिंया दी गईं, और कहा कि तुम काफिर हो। इस पर जज साहब ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम को चिट्टी लिखी, जिसमें उन्होंने विस्तरित रूप से लिखा कि उन्हें इस तरह से धमकियां मिल रही हैं। चिट्ठी और इंस्टाग्राम की भाषाशैली बिल्कुल एक जैसी है। काफिर शब्द का कई बार प्रयोग किया है। जज साहब ने यह भी लिखा कि उनके भाई जो जज हैं उनको भी असुरक्षा है।
बरेली में तैनाती के दौरान वर्ष 2010 में हुए दंगा में तौकीर रजा को बताया पूरी तरह जिम्मेदार और दोषी
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने जारी वीडियो में कहा है कि एक उल्लेखनीय बात यह है कि जज साहब ने वर्ष 2024 में तौकीर रजा खान के प्रकरण में यह स्पष्ट लिखा था कि तौकीर रजा खां 2010 के बरेली दंगे में पूरी तरीके से जिम्मेदार और दोषी हैं। तीन लैंड मार्क चीजें जज रवि कुमार दिवाकर ने दीं। एक ज्ञानवापी वाली, दूसरी तौकीर रजा खान को लेकर, और इसके अलावा समय-समय पर जो बातें हुईं, उनको लेकर जज साहब ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम को चिट्ठी लिखी।
पूर्व डीजीपी बोले- ज्ञापवापी प्रकरण में जज ने निर्भीकता, राष्ट्र प्रेम और कानून को सर्वेच्च मानकर दी थी व्यवस्था
एडीजी का कहना है कि दुर्भावना के चलते जज साहब की सुरक्षा में हीला हवाली हो रही है। जज रवि कुमार दिवाकर ने अपनी सुरक्षा की अनदेखी कर निर्भीकता का परिचय देते हुए राष्ट्र प्रेम और कानून को सर्वोपरि रखकर एक व्यवस्था दी, जो सामान्य तौर पर लोग नहीं देते या हीला-हवाली कर पीछे हट जाते हैं। मगर जस्टिस रवि कुमार दिवाकर पीछे नहीं हटे, जिससे उनकी हर जगह प्रशंसा हो रही है। उम्मीद की गई थी कि उन्हें सुरक्षा दी जाएगी। मगर उन्हें सुरक्षा नहीं दी जा रही। देखा गया है कि उनका गनर कई-कई दिन छुट्टी पर चला जाता है। शिकायत करने पर उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
पूर्व डीजीपी ने कहा कि वह इस वीडियो को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम, डीजीपी, एडीजी कानून व्यवस्था को टैग करेंगे। वीडियो के जरिए उन्होंने जस्टिस रवि कुमार दिवाकर की अभेद्य सुरक्षा की मांग की है।