जागरण टुडे, कासगंज।
चर्चित झाल के पुल गैंगरेप प्रकरण में गुरुवार की रात बड़ा मोड़ सामने आया है। पुलिस की निगरानी के बावजूद मामले की नाबालिग पीड़िता संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस व प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। फिलहाल पुलिस टीम सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ किशोरी की तलाश में जुटी है।
दरअसल, 10 अप्रैल को झाल के पुल पर अपने मंगेतर के साथ मौजूद नाबालिग किशोरी के साथ पुलिस बनकर आए युवकों ने बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। इस जघन्य कांड में पुलिस ने अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से अधिकांश आरोपी फिलहाल जमानत पर रिहा हैं।
23 अप्रैल को मिली थी आरोपियों को जमानत
मामले में भाजपा नेता अखिलेश प्रताप सिंह उर्फ गब्बर एपीएस, अमित, सोनू उर्फ सत्यपाल, रिंकू कुमार और सोनू को स्थानीय न्यायालय ने 23 अप्रैल को दो-दो लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दी थी। आरोपियों को रिहाई मिलने के बाद पीड़िता के परिजनों ने पुलिस प्रशासन को पत्र देकर अनहोनी की आशंका जताई थी। पीड़िता और उसकी मां ने आत्मदाह की चेतावनी तक दी थी।
उनकी आशंका को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी 14 आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। इसके बाद पीड़िता के घर पर चौबीसों घंटे पुलिस का पहरा लगा दिया गया था, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
संदिग्ध हालात में गायब हुई पीड़िता
इसके बावजूद गुरुवार की देर रात किशोरी अपने घर से रहस्यमय तरीके से लापता हो गई। घर के बाहर मौजूद पुलिसकर्मियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। घटना का पता चलने पर थाना पुलिस, सीओ और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
थाना प्रभारी प्रवेश राणा ने बताया कि पुलिस टीम पीड़िता की तलाश में सक्रिय है और कुछ अहम सुराग मिले हैं। जल्द ही किशोरी को सुरक्षित बरामद कर लिया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर से पूरे जिले को झकझोर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब पुलिस पहरा दे रही थी, तो आखिर पीड़िता कैसे गायब हो गई।