तीन दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा पर्व है। श्रद्धालु रामगंगा में स्नान कर दान पुण्य करते हैं। मीरगंज और आंवला तहसील क्षेत्र के गोरा लोकनाथपुर व बाबा कैलाश गिरि घाट को जोड़ने वाली एप्रोच सड़कें बाढ़ और वर्षा की विभीषका में कट गई थीं। पीडब्ल्यूडी विभाग की अनदेखी के कारण अब तक मरम्मत न होने से चार पहिया वाहन तक नहीं गुजर पा रहे हैं। ऐसे में गंगा स्नान मेलों में पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए जोखिम भरा और चुनौती पूर्ण हो गया है।
गोरा लोकनाथपुर गंगा घाट तक पहुंचना हुआ मुश्किल
जनपद बरेली के मीरगंज तहसील इलाके के गोरा लोकनाथपुर गांव के समीप रामगंगा घाट पर सदियों से कार्तिक पूर्णिमा मेला 04 नवंवर से 6 नवंवर तक आयोजित होगा, जिसमें मुख्य स्नान 5 नवंवर को है। लेकिन हाल की बरसात में घाट तक जाने वाली लगभग एक किलो मीटर एप्रोच रोड पूरी तरह से कई जगहों पर कट चुकी है। और पुलिया के समीप सड़क काफी कट जाने के कारण चार पहिया वाहनों का आवागमन बंद हो गया है। और जो भी हल्का वाहन निकलता है। वह भी जोखिम भरा रहता है। इसी जगह हाल ही में एक रिटायर्ड फौजी प्रेमपाल निवासी गुलड़िया गौरी शंकर की मृत्यु भी हो चुकी है, जबकि लकड़ी लदी दो टै्रक्टर ट्राली पलटने से बचीं। इससे मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के मन में भय का माहौल व्याप्त है।
पुल बना, मगर पहुंच अधर में
गोरा लोकनाथपुर के पास रामगंगा पर बना लम्बा पुल वर्ष 2018-19 में बनकर तैयार हो गया था, जबकि एप्रोच रोड 2021-22 में बनकर तैयार हुई और आवागमन सुचारू हो गया।लेकिन अब उसी मार्ग पर बड़ा हिस्सा बह गया है। प्रशासन ने स्थिति का संज्ञान लिया है- एसडीएम मीरगंज आलोक कुमार, सीओ अजय कुमार और एसओ प्रयागराज सिंह ने मौके का निरीक्षण कर रिर्पोट जिलाधिकारी बरेली को भेज दी है। पीडब्ल्यूडी विभाग का कहना है कि सड़क दुरस्तीकरण हेतु प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और स्वीकृति मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू किया जायेगा।
कैलाश गिरी बाबा रामगंगा घाट की राह भी टूटी
इसी तरह मीरगंज तहसील के मदनापुर (बिलायतगंज) गांव से बाबा कैलाश गिरी मढ़ी रामगंगा घाट तक जाने वाला मार्ग भी जगह-जगह से कट चुका है। श्रद्धालु अपने वाहन खेतों के रास्ते से निकालने को मजबूर हैं। इससे मेले के दौरान जाम, दुर्घटना और अव्यवस्था की आशंका बढ़ गई है।
भक्ति और प्रशासनिक जिम्मेदारी की दो राहें
हर साल हजारों श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा पर इन घाटों पर स्नान करने हेतु आते हैं, लेकिन इस बार टूटी सड़कों ने आस्था के उत्सव को चिंता में बदल दिया है। प्रशासन और विभागों के बीच प्रस्तावों की फाइलें घूम रही हैं, जबकि स्थानीय लोग और मेला समिति सुरक्षा, व यातायात को लेकर फूंक फूंककर कदम रख रही है।
मेला अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधान बाबूराम कश्यप् का कहना है कि इस बार एप्रोच रोड की खस्ताहाल स्थिति ने चिंता में डाल दिया है। कि आवागमन के दौरान किसी के साथ कोई अनहोनी न हो जाये। उन्होंने कहा कि आस्था के इस पवित्र पर्व पर मेला तो आयोजित होगा ही, लेकिन काफी सर्तकता बरतनी होगी। और कमेटी की बैठक कर मेला ग्राउंड में सुविधाओं की व्यवस्था हेतु योजना को तैयार कर लिया गया है।