बरेली जनपद की आंवला तहसील में बुधवार को एक अजीब मामला सामने आया। जनसुनवाई के दौरान एसडीएम के सामने पहुंचे एक किसाने कहा कि साहब मैं अभी जिंदा हूं, लेकिन फर्जी तरीके से मुझे मृत दिखाकर मेरली किसान सम्माननिधि बंद कर दी गई। वहीं, एक दूसरा मामला जमीन विवाद का सामने आया। बताते हैं कि किसान भूमि विवाद में न्यायालय के आदेशों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे आहत होकर किसान ने आत्महत्या की चेतावनी दी है।
आंवला तहसील के रामनगर ब्लॉक क्षेत्र के अजमेर गांव निवासी जाकिर खां ने एसडीएम को बताया कि उन्हें लंबे समय से किसान सम्मान निधि मिल रही थी। मगर हाल में विभागीय रिकॉर्ड में उन्हें “मृत” घोषित कर दिया गया। इसके बाद उनकी सम्मान निधि का भुगतान रोक दिया गया। इसका पता लगने पर जाकिर खां ने मामले की शिकायत अधिकारियों से की। उन्होंने पता किया तो मालूम हुआ कि कागजों में उनका नाम मृत सूची में दर्ज है। इसके बाद जाकिर खां ने एसडीएम आंवला विदुषी सिंह से मिले और उन्हें बताया कि वह अभी जीवित हैं, जिससे उनकी सम्मान निधि दोबारा शुरू कर दी जाए। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ने मामले की जांच तहसीलदार को सौंप दी। अब पीड़ित को जांच रिपोर्ट आने का इंतजार है।
वहीं, दूसरा मामला आंवला थाना क्षेत्र के महमूदपुर गांव का है। उनका कहना है कि उनकी जमीन गाटा संख्या 265 का विवाद उच्च न्यायालय प्रयागराज में उनके पक्ष में निपटा है, और अदालत ने स्टे ऑर्डर भी दिया है, फिर भी स्थानीय प्रशासन विपक्षी को संरक्षण दे रहा है। सुमित शर्मा का आरोप है कि पिछले वर्ष उनकी गेहूं की फसल जबरन काट ली गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। लगातार अदालती आदेशों की अनदेखी से वह मानसिक रूप से टूट चुके हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मामलों से किसानों का प्रशासन से विश्वास डगमगा रहा है। यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई न हुई तो आक्रोश बढ़ सकता है।