सड़क सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने 01 अप्रैल से 30 अक्टूबर 2025 के बीच विशेष चेकिंग अभियान चलाया। संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ), बरेली पंकज सिंह ने बताया कि 01 अप्रैल से 30 अक्टूबर तक चलाए गए विशेष चेकिंग अभियान के दौरान 497 बसों के विरुद्ध प्रवर्तन कार्रवाई की गई है। इनमें जनपद बरेली की 135 बसें, बदायूं की 102, पीलीभीत 130 और शाहजहांपुर की 130 बसें शामिल हैं।
आरटीओ ने बताया कि विभाग के सचल और अचल प्रवर्तन दल लगातार सड़कों पर निगरानी रख रहे हैं। 24 घंटे मॉनिटरिंग के माध्यम से नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। आरटीओ ने कहा कि लोगों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देने के लिए विभाग निरंतर जागरूकता अभियान, सेमिनार और सड़क सुरक्षा गतिविधियां आयोजित कर रहा है।
आरटीओ पंकज सिंह ने बताया कि जनपद में संचालित सभी बसों की बॉडी केवल ARAI (Automotive Research Association of India) से प्रमाणित संस्थाओं द्वारा ही निर्मित की जाती है। बॉडी निर्माता द्वारा प्रमाण पत्र जारी होने के बाद ही वाहन की फिटनेस और पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि भारतीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने बस बॉडी निर्माण के मानक तय किए हैं जिसके तहत स्लीपर बसों के लिए AIS-119 और सामान्य बसों के लिए AIS-052। इन मानकों के तहत बसों में संरचनात्मक मजबूती, अग्नि सुरक्षा, आपात निकास और यात्री सुरक्षा से संबंधित सभी तकनीकी नियमों का पालन अनिवार्य है।
आरटीओ ने बताया कि अधिकांश पर्यटक बसें ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट के अंतर्गत संचालित होती हैं। इनके मालिकों द्वारा तीन माह के लिए 90,000 रुपये या एक वर्ष के लिए 3, लाख 20 हजार रुपये शुल्क जमा करके राज्य परिवहन प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त की जाती है। इन बसों को निर्धारित मार्गों पर विभिन्न गंतव्यों तक सवारियां लेने और उतारने की अनुमति होती है।
उन्होंने बताया कि जनपद बरेली से होकर चार राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-30, एनएच-24, एनएच-21 और एनएच-530बी गुजरते हैं, जो प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों को जोड़ते हैं। इन मार्गों पर लंबी दूरी की अधिकतर बसें संचालित होती हैं, जो विभिन्न जिलों और राज्यों में पंजीकृत हैं। आरटीओ ने कहा कि सड़क पर सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए कार्रवाई के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी जोर दिया जा रहा है।