‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम के तहत पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केन्व्यू के संयुक्त तत्वावधान में नगर के एक होटल में कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कैमिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष भोला यादव ने की। कार्यशाला का उद्देश्य शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों में डायरिया से होने वाली मृत्यु दर को समाप्त करना और दस्त प्रबंधन के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना था। वक्ताओं ने कहा कि मां का दूध बच्चे के लिए अमृत समान होता है। इसलिए डायरिया के दौरान भी स्तनपान कराना चाहिए।
पीएसआई इंडिया के सीनियर मैनेजर अनिल द्विवेदी ने संस्था के कार्य और “डायरिया से डर नहीं” अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के 13 जिलों और बिहार के 3 जिलों में चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य शिशु स्वास्थ्य में सुधार और ओआरएस व जिंक के प्रयोग को बढ़ावा देना है। कैमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष भोला यादव ने कहा कि डायरिया से मृत्यु दर घटाने में इलाज और दवा के साथ जागरूकता की भी बड़ी भूमिका है। यदि सलाह देकर किसी बच्चे का जीवन बचाया जा सके, तो जनपद के सभी दवा व्यापारी इस मुहिम में पीएसआई इंडिया के साथ मिलकर काम करेंगे।”
कार्यशाला के दौरान गोविंद मेडिकल स्टोर के गोविंद अग्रवाल ने सवाल किया कि क्या सर्दियों में भी ओआरएस घोल देना उचित है? इस पर भोला यादव ने बताया कि ओआरएस हर मौसम में दिया जा सकता है, इससे बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता। अनिल द्विवेदी ने कहा कि मां का दूध बच्चे के लिए अमृत समान होता है। डायरिया के दौरान भी बच्चे को स्तनपान कराना चाहिए, क्योंकि इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
कार्यक्रम में आशीष चतुर्वेदी, दिनेश जैन, अमित बंसल, जयंत पाल, पवन अग्रवाल, लवी खंडेलवाल, महेंद्र उपाध्याय, आशीष, कोमल घई, अजय कुमार, चोब सिंह सहित अनेक दवा व्यापारी एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अंत में अमित बंसल ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला का समापन किया।