जागरण टुडे, बरेली
करीब तीन माह पहले गोपनीय जानकारी मिलने पर आगरा दवा बाजार में ताबड़तोड़ छापेमारी हुई थी, जिसमें बंसल और हेमा नामक फर्मों ने बड़े स्तर पर किया गया खेल पकड़ा गया। इन फर्मों ने कई महंगी दवाएं नकली बनवाकर उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बेच दीं। इसअवैध धंधे में बरेली वाले भी पीछे नहीं रहे, उन्होंने इन फर्मों से नकली दवाइयां औने पौने दामों पर खरीदकर ऊंची कीमतों पर बाजार में खपा दीं। मरीजों ने इन नकली और महंगी दवाइयों का इस्तेमाल किया तो उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ। इस तरह सेहत से खिलवाड़ करने वालों ने सौ करोड़ से ऊपर का धंधा किया। विभागीय जांच में बरेली में कार्यरत चार फर्में दोषी पाई गई हैं।
आगरा की पांच, लखनऊ की दो और पांडुचेरी की तीन फर्मों से बेची गईं संदिग्ध दवाएं
नकली दवा कारोबार सिंडीकेट ने आगरा, लखनऊ, बरेली समेत दर्जन भर प्रमुख फर्मों के अलावा दो दर्जन से अधिक राज्यों में संदिग्ध दवाएं बाजार में खपा दीं। जानकारी मिलने पर विशेष जांच दल ने आगरा स्थित दवा बाजार में अगस्त माह में हेमा मेडिको और बंसल मेडिकल एजेंसी पर छापा कार्रवाई कर दी। कई दिनों जांच चलने पर पता चला आगरा की पांच, लखनऊ की दो और पांडुचेरी की तीन फर्मों से संदिग्ध दवाइयों बेची जा रही हैं। जिनकी सप्लाई उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, दिल्ली, उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों में हो रही थी। गहराई से जांच हुई तब पता चला कि पांडुचेरी में प्रोडक्ट तैयार किए गए, लेकिन वहां तीन फर्म और फैक्ट्रियां बंद हैं, उनके संचालक और अन्य फरार हैं। संदिग्ध दवाएं बिक्री करने में सबसे अधिक बरेली, लखनऊ, कानपुर, मुजफ्फर नगर आदि प्रमुख जिलों में हुई है।
बाबा रोड लिंकर से पकड़ी गई थीं हैप्पी मेडिकोज की संदिग्ध दवाइयां
इसी आधार पर बरेली में भी छापामार कार्रवाई हुई। बरेली में तैनात तेज तर्रार सहायक औषधि आयुक्त (औषधि) बरेली मंडल संदीप कुमार ने अपने विश्वनीय टीम अधिकारी बरेली बाजार में छापा कार्रवाई हेतु रवाना कर दिए, जिन्होंने शास्त्री मार्केट, गली नवाबान, कोहाड़ापीर आदि प्रमुख बरेली बाजार में सघन छापामारी शुरू कर दी। हैप्पी मेडिकोज नामक प्रतिष्ठान से संबंधित करीब साढ़े पांच लाख की संदिग्ध दवाएं, बाबा रोड लिंकर प्रेमनगर से पकड़कर जब्त कर लीं।
बरेली बाजार नकली और संदिग्ध दवा कारोबार में लंबे समय से लगा हुआ है। गिने चुने लोग ही ईमानदारी से काम कर रहे हैं। काले धंधे में शामिल होल सेलर से जाने अनजाने में रिटेलर भी खरीदारी करते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम की दवा असली है या नकली, लेकिन मिलने वाले कमीशन के लालच में फंस जाता है।
बरेली से आगरा तक सीधे जुड़े हैं धंधेबाजों के तार
सहायक आयुक्त संदीप कुमार ने पिछले दिनों आगरा से मिली गोपनीय सूचनाओं पर अपने सक्रिय अधिकारी राजेश कुमार, उर्मिला वर्मा, अनामिका जैन छापेमारी में लगाए। छापा टीम ने मेहनत कर कई खुलासे कर दिए। इन खुलासों में सिद्ध हो गया कि बरेली से आगरा तक सीधे तार जुड़े हैं। कुछ फर्में जान बूझकर नकली और संदिग्ध दवाएं बरेली रिटेल बाजार तक पहुंचा रही हैं। जाने अनजाने खुदरा दवा कारोबारी मोटा कमीशन के लालच में चपेट में आ गए। इन पर भी कार्रवाई शुरू हो गई है। कई फर्मों से खरीद फरोख्त संबंधी कागजात तलब किए गए हैं। अभी तक चार फर्मों पर कार्रवाई हुई है।
बरेली में इन चार प्रमुख कारोबारियों पर हुई कार्रवाई
औषधि निरीक्षक राजेश कुमार ने बताया बरेली में आगरा छापा से संबंधित नकली /काउंटरफिट /नशीली एवं कफ सीरप में मिलावट, औषधियों के क्रय विक्रय पर प्रभावी रोकथाम क्रम में मैसर्स लखनऊ ड्रग एजेंसी, साहनी मेडिकल स्टोर, गुनीना फार्मास्युटिकल्स, गली नवाबान और माधव एजेंसी कोहाड़ापीर व अन्य फर्मों पर गठित टीम द्वारा छापेमार कार्यवाही की गई थी। औषधि विक्रय लाइसेंस एवं भंडारित एलोपैथिक औषधियों के क्रय-विक्रय अभिलेख एवं भंडारित औषधियों की गुणवत्ता के सम्बन्ध मे सघन जांच की गयी थी। मौके पर सभी मेडिकल स्टोर की निरीक्षण आख्या तैयार की गई थी। मेडिकल स्टोरों से विक्रयार्थ भंडारित औषधियों में से संदेह के आधार पर नमूने विभिन्न प्रकार की एलोपैथिक औषधियों के नमूने जांच एवं विश्लेषण हेतु लिए गए थे, जिन्हें राजकीय प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया था। जिसमें कुल चार फर्मों की विवेचना पूर्ण होने पर विभाग द्वारा कड़ी कार्यवाही अमल में लाई गई है।
लखनऊ ड्रग एजेंसी एजेंसी, साहनी मेडिकल स्टोर गली नवाबान, माधव एजेंसी कोहाड़ापीर के लाइसेंस अग्रिम आदेशों तक निलंबित किए गए हैं। इन प्रतिष्ठानों पर दवा खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी गई है। जबकि सबसे गंभीर मामला ग़ुनीना फार्मास्युटिकल्स गली नवाबन से संबंधित था। इसलिए न्यायालय बरेली में परिवाद दाखिल किया गया है। शेष फर्मों की विवेचना पूर्ण होने के पश्चात दोषी व्यक्तियों/फर्मों के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही होगी।