गुलरेज आलम, बरेली
बरेली शहर की पाक सरज़मीन पर वर्षों पुरानी रूहानी विरासत एक बार फिर ज़िंदा हो उठी है। हज़रत क़ुतुब-ए-आलम, मदार-ए-आज़म शाह नियाज़ अहमद साहिब का 197वां सालाना उर्स-ए-मुबारक रविवार 23 नवम्बरसे शुरू हो गया। उर्स का आगाज़ सुबह की नमाज़ के बाद कुरानख़्वानी से हुआ। उर्स के दूसरे दिन दिन सोमवार को भी दूर-दराज़ से आने वाले जायरीन की आमद जारी है।
उर्स के पहले दिन रविवार को अकीदतमंदों ने मजार पर चादर पेश की और अमन-चैन, खुशहाली तथा सेहत की दुआ मांगीं। शाम के वक़्त महफ़िल-ए-समा में सूफियाना कलाम और नात पेश की गईं, जिनसे रूहानी माहौल और भी निखर उठा। खानकाह प्रबंधन के अनुसार इस वर्ष उर्स तीन दिनों तक चलेगा और इस दौरान कई धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। उर्स के दूसरे दिन सोमवार को सुबह से ही कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया। उर्स में जायरीनों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है।
26 नवम्बर को उर्स की मुख्य रस्में अदा की जाएंगी। इस दिन दोपहर बाद महफ़िल-ए-क़व्वाली आयोजित होगी, जिसमें मशहूर क़व्वाल हज़रत मोहम्मद इमरान मुजीबुल्लाह अपने कलाम पेश करेंगे। रात को मजलिस-ए-शिरिनाई में चिराग़ां और अकीदतमंदों का विशाल जमावड़ा देखने को मिलेगा। 27 नवम्बर की सुबह 9 बजे रसान्जल निशानी सरकार हज़रत मेहंदी मियां नियाज़ी की सदारत में गुस्ल की रस्म अदा की जाएगी। शाम को होने वाली महफ़िल-ए-क़व्वाली में देशभर के नामी फनकार शामिल होंगे।
28 नवम्बर को हल्का-ए-ज़िक्र, फातिहा, कुल शरीफ़ और विशेष दुआओं का सिलसिला चलेगा। वहीं 29 को महफ़िल-ए-समा के साथ उर्स का समापन होगा। इस दिन अकीदतमंदों की बड़ी संख्या में मौजूदगी की संभावना है। खानकाह-ए-आलिया नियाज़िया के प्रबंधक जुनैदी मियां नियाज़ी ने बताया कि उर्स के दौरान सुरक्षा, पार्किंग और भीड़-प्रबंधन के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। शहर भर से जायरीन की आमद का अनुमान है, जिससे बरेली की रौनक कई गुना बढ़ गई है।