विहार पंचमी के पावन अवसर पर श्रीकृष्ण-जन्मस्थान (जन्मभूमि) परिसर में सांयकालीन बेला के दौरान आयोजित श्रीराम–जानकी विवाह उत्सव अद्भुत आध्यात्मिक उल्लास और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। जन्मभूमि क्षेत्र में हर तरफ भक्तिरस की धारा प्रवाहित होती दिखाई दी, जहाँ हजारों भक्त भगवान श्रीराम और माता जानकी के दिव्य विवाह उत्सव के साक्षी बने।
कार्यक्रम की शुरुआत अन्नक्षेत्र परिसर में स्थित अन्नपूर्णेश्वर महादेव प्रांगण से हुई, जहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के प्रतीक स्वरूप शालिग्राम जी को अलंकृत कर भव्य बारात निकाली गई। पारंपरिक ढंग से सजाई गई यह दिव्य शोभायात्रा जैसे ही आगे बढ़ी, वातावरण हरिनाम संकीर्तन, मंत्रोच्चारण और घंटा-घड़ियालों की पवित्र ध्वनि से गूंज उठा।
भक्तगण, साधु-संत, कीर्तनमंडलियाँ और दर्शनार्थी बारात में उमंग और उत्साह के साथ शामिल हुए। शोभायात्रा श्रीकेशवदेव जी, श्रीगर्भ-गृह प्रांगण से होकर निकली, जिसके बाद भागवत-भवन की परिक्रमा की गई। परिक्रमा के उपरांत बारात वहां स्थित श्रीराम मंदिर पहुँची, जहाँ पूजाचार्यों द्वारा वेद-मंत्रों के उच्चारण के साथ विवाह की संपूर्ण वैदिक परंपराएँ विधिपूर्वक संपन्न कराई गईं।
बारात की शोभा हरिनाम संकीर्तन की धुन पर नृत्य करते भक्तों की उमंग से देखते ही बन रही थी। नन्हे-मुन्नों से लेकर वृद्धों तक, सभी का उत्साह और भक्ति इस दिव्य आयोजन को और भी पावन बना रहा था। स्थानीय भक्तों के साथ देशभर से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने इस पुण्य अवसर पर सहभागिता कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
विवाह उत्सव के उपरांत श्रीकृष्ण-जन्मस्थान परिसर में विशेष प्रसादी-भण्डारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। संपूर्ण परिसर में दिव्यता, भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का अद्भुत समन्वय दिखाई दिया, जिसने इस पर्व को अविस्मरणीय बना दिया।