जागरण टुडे, लहरा,कासगंज।
तीर्थ नगरी सोरों के लहरा गांव में मार्गशीष मास के पावन अवसर पर सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का शुभारंभ बुधवार को विधि-विधान एवं भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित निदान जी महाराज ‘भैया जी’ ने लहरेश्वर महादेव मंदिर से निकली कलश यात्रा का नेतृत्व करते हुए गांव की परिक्रमा कराई। श्रद्धालु महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर जयकारों के साथ यात्रा में उत्साहपूर्वक सहभागिता की, वहीं वातावरण भक्तिमय संगीत और हरि-नाम संकीर्तन से गूंज उठा।
कथा के प्रथम दिवस में पं. निदान जी महाराज ने श्रीमद्भागवत का महत्व विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला प्रकाशस्तंभ है। पंडित जी ने कहा कि मृत्यु को जान लेने से उसके भय का नाश हो जाता है। जैसे परीक्षित ने श्रीमद्भागवत का श्रवण कर अभय की प्राप्ति की थी, उसी प्रकार यह दिव्य कथा जीवात्मा को निर्भय बनाती है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत परमात्मा का अक्षर रूप है और यह परमहंसों की परम संहिता के रूप में पूजनीय है। इसका श्रवण हृदय को पवित्र कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
पं. ओझा ने आगे कहा कि मार्गशीर्ष के इस संयोग में कथा श्रवण का विशेष फल प्राप्त होता है। यह दिव्य ग्रंथ वेदों और उपनिषदों का सार है तथा भक्त के भीतर भगवान के प्रति अनुराग और समर्पण की भावना जागृत करता है। उन्होंने भागवत कथा को देवताओं के लिए भी दुर्लभ अमृत बताया।
कथा स्थल पर प्रतिदिन संगीतमय प्रस्तुतियों, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचनों से वातावरण भाव-विभोर बना हुआ है। कार्यक्रम में भोपाल से आए राजेंद्र शर्मा, नीरज के साथ ही सौरभ, ऋषभ, अरुण सक्सेना, सर्वेश सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कराई। आयोजन समिति ने ग्रामीणों से अधिक-से-अधिक संख्या में कथा के पवित्र पर्व का लाभ लेने की अपील की है।