जागरण टुडे,कासगंज।
दुर्गा कॉलोनी स्थित कमला हॉस्पिटल में प्रसव के दौरान गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिजनों ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी व उत्तर प्रदेश महिला आयोग से कार्रवाई की मांग की है। ग्राम अलीपुर दादर निवासी नीरज कुमार ने महिला आयोग लखनऊ को भेजे प्रार्थना पत्र में बताया कि वह 12 नवंबर की रात अपनी पत्नी रजनी (25) को प्रथम प्रसव के लिए कमला हॉस्पिटल लेकर आए थे। परिजनों के अनुसार डॉ. रिचा ने जांच के बाद आश्वस्त किया था कि नार्मल डिलीवरी होगी और किसी प्रकार की जटिलता नहीं है।
13 नवंबर की सुबह रजनी ने एक स्वस्थ पुत्री को जन्म दिया। प्रसव के बाद कुछ समय तक सबकुछ सामान्य रहा, लेकिन थोड़ी देर बाद अचानक प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी। नीरज के अनुसार डॉक्टर की ओर से बताया गया कि रजनी को अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही है और स्थिति संदिग्ध लग रही है, जिसे एक्रीटा का मामला बताया गया। प्रसूता की हालत गंभीर होती देख स्टाफ ने तत्काल उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
जिला अस्पताल पहुँचने पर, नीरज के मुताबिक वहां के डॉक्टरों ने बच्चेदानी निकालने का दबाव बनाया, यह कहते हुए कि माँ की जान बचाने के लिए ऑपरेशन आवश्यक है। मजबूर होकर परिजनों ने अनुमति दे दी। लेकिन ऑपरेशन के दौरान बच्चेदानी बाहर आने पर वह सामान्य अवस्था में दिखी और अंदर प्लेसेंटा भी नहीं था, जिससे नीरज और उनके परिजनों ने एक्रीटा की आशंका को गलत बताया।
परिजनों का दावा है कि डिलीवरी से पहले कराए गए अल्ट्रासाउंड में भी एक्रीटा या किसी गंभीर जटिलता का जिक्र नहीं था। नीरज ने यह भी आरोप लगाया कि प्रसव के दौरान डॉक्टर रिचा मौजूद नहीं थीं और महत्वपूर्ण समय पर हॉस्पिटल स्टाफ द्वारा लापरवाही की गई, जिसकी वजह से प्रसूता की स्थिति बिगड़ी और उसे अतिरिक्त जोखिम झेलना पड़ा।
पीड़ित परिवार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने, कमला हॉस्पिटल की भूमिका की पड़ताल करने और दोषी डॉक्टरों व स्टाफ के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते सही इलाज और उचित देखरेख मिलती, तो प्रसूता को इस तरह की गंभीर स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।