एजेंसी, दिल्ली। लोकसभा का शीतकालीन सत्र 2025 सोमवार से शुरू होते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई। पहले ही दिन सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। जैसे ही सत्र आरंभ हुआ, विपक्षी दलों ने SIR यानी मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सरकार के खिलाफ हमला बोलना शुरू कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार चुनावी वर्ष में मतदाता सूची में बदलाव कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। इसी मुद्दे पर विपक्ष ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे सदन का माहौल गरमा गया।
सत्र के एजेंडे में GST संशोधन विधेयक भी शामिल था, जिस पर पहले से ही राज्यों और व्यापारिक संगठनों की नजर बनी हुई है। सरकार का दावा है कि ये संशोधन टैक्स ढांचे को सरल बनाएंगे और राज्यों को स्थिर राजस्व उपलब्ध कराएंगे, वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार ने इस बिल पर पर्याप्त परामर्श नहीं किया और राज्यों की चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया है। इसी वजह से GST मुद्दा भी टकराव का केंद्र बन गया।
लोकसभा में जैसे ही चर्चा आगे बढ़ने की उम्मीद थी, विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए वेल में उतर आए। उन्होंने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता और GST विधेयक की समीक्षा की मांग दोहराई। बढ़ते शोर और अव्यवस्था को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष को कार्यवाही पहले दोपहर तक और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा। राज्यसभा की स्थिति भी अलग नहीं रही। वहां भी विपक्ष ने दोनों महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखी आपत्ति जताई और विस्तृत चर्चा की मांग की।
इस बीच, सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष बहस से बचने के लिए हंगामा कर रहा है, जबकि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि इस सत्र में कई अहम विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे जो अर्थव्यवस्था और चुनावी सुधार से जुड़े हैं।
पहले दिन की गंभीर टकराहट से संकेत मिल रहे हैं कि शीतकालीन सत्र आगे और भी गरम हो सकता है। अब नज़र इस बात पर है कि SIR और GST जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दोनों पक्ष आम सहमति बना पाते हैं या सत्र अखाड़े में बदलता है।