डीफार्मा की फर्जी डिग्री बांटकर ठगी करने के आरोपी शेर अली जाफरी, उसके बेटे एवं गुर्गों कानूनी शिकंजा और कस गया है। जनपद बरेली के थाना इज्जतनगर इलाके के सैदपुर हाकिंस निवासी अभिषेक गंगवार ने सीबीगंज थाने के गैंगस्टर शेर अली जाफरी, उसके बेटे फिरोज और खुसरो कॉलेज के प्राचार्य विश्सनाथ शर्मा आदि पर डीफार्मा का फर्जी अंकपत्र देकर फीस हड़पने और दो साल बर्बाद करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई है। फर्जी डिग्री बांटने के मामले में पहले से ही उस पर मुकदमे दर्ज हैं। शेर अली जाफरी कानूनी शिकंजे से बचने के लिए पहले भाजपाई बना, और जेल जाने के बाद जमानत पर छूटने के बाद वह किसान संगठन का पदाधिकारी बन गया।
300 छात्रों को फर्जी डिग्री देकर करोड़ों रुपये ठगने का आरोप
शेर अली जाफरी, फिरोज अली जाफरी, विश्वनाथ शर्मा, विजय शर्मा, जाकिर और तारिक अल्वी पर करीब 300 छात्रों को फर्जी डिग्री थमाकर करोड़ों रुपये ठगने का आरोप है। अभिषेक गंगवार के मुताबिक उन्होंने खुसरो इंस्टीट्यूट में डीफार्मा कोर्स के लिए प्रवेश लिया था। कोर्स की मान्यता न होने के बावजूद खुसरो इंस्टीट्यूट के चेयरमैन शेर अली जाफरी, उसके बेटे फिरोज अली जाफरी, प्राचार्य विश्वनाथ शर्मा और अन्य स्टाफ ने दाखिला लेकर फीस वसूल ली।
कोर्ट के आदेश पर सीबीगंज थाने में दर्ज हुई रिपोर्ट
कोर्स पूरा होने पर उन्हें किसी अन्य कॉलेज का अंकपत्र थमा दिया। कॉलेज ने उनसे खर्च लेकर ड्रग लाइसेंस बनवाने के लिए जरूरी ग्रीन कार्ड का आवेदन कराया, लेकिन वह नहीं बना। काफी टालमटोल के बाद पता चला कि कॉलेज द्वारा दिया गया अंकपत्र फर्जी है। आरोप है कि शेर अली जाफरी और उसके गुर्गों ने उनसे धोखाधड़ी की है। कॉलेज का स्टाफ भी जान से मारने की धमकी देता है। अभिषेक के प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश पर अब सीबीगंज थाने में सभी आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
जाफरी ने जेल जाने से पहले की भाजपा नेता बनने की कोशिश
जेल जाने से पहले शेर अली जाफरी ने भाजपा नेता के तौर पर पहचान बनाने की कोशिश की थी। खुद को कानूनी शिकंजे से बचाने के लिए वह बड़े नेताओं और अफसरों की खूब खातिरदारी करता था। उन्हीं दिनों उस पर करीब 300 छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर फर्जी मार्कशीट थमाने और करोड़ों रुपये हड़पने का आरोप लगा था। शेर अली जाफरी और उसके गुर्गों पर कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने शेर अली जाफरी, उसका बेटा और गुर्गों को गिरफ्तार करके जेल भेजा था।
जेल से छूटने के बाद किसान एकता संघ से जुड़ गया शेर अली
शेर अली जाफरी जेल से छुटने के बाद खुद को सफेदपोश साबित करने की कोशिश करने लगा। पहले उसने दोबारा भाजपा में घुसने की कोशिश की, लेकिन बदनामी के डर से भाजपा नेता दूरी बनाए रहे। इसके बाद उसने जिले के एक किसान नेता से सेटिंग की और किसान एकता संघ से जुड़ गया।
क्रार्यक्रमों में प्रशासन को देने लगा चेतावनी
इतना ही नहीं, किसान एकता संघ से जुड़ने के बाद वह कार्यक्रमों और ज्ञापन देकर प्रशासन और पुलिस को चेतावनी देने लगा। हाल ही में उसकी मिनी बाईपास रोड स्थित बिल्डिंग में रेस्टोरेंट खोला गया है। बताते हैं कि कानूनी शिकंजे से बचने के लिए उसने कइयों से जुगाड़ भिड़ा रखा है। हालांकि पुलिस दोबारा कार्रवाई की तैयारी में है।
साठगांठ के चलते संपत्ति नहीं हुई कुर्क
साल की शुरूआत में शेर अली जाफरी, उसके पुत्र फिरोज अली जाफरी, जाकिर, तारिक अलवी, विजय शर्मा और विश्वनाथ शर्मा के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की गई थी। इन लोगों ने खुद ही अंक पत्र बनाकर मेडिकल छात्रों को बांट दिए थे। जब छात्रों ने नौकरी के लिए आवेदन किया तो फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था। इससे पूरे गिरोह ने अवैध संपत्ति अर्जित की। साठगांठ के चलते गैंगस्टर की कार्रवाई के बाद भी आरोपियों की अवैध संपत्तियों को चिह्नित नहीं किया गया।
मौलाना तौकीर रजा का करीबी रहा है शेर अली जाफरी
डीफार्मा के फर्जी अंक्रपत्र देकर 300 छात्रों से करोड़ों की ठगी करने का आरोपी शेर अली जाफरी 26 सितंबर को बरेली में हुए बवाल के मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा का करीबी माना जाता है। वह तौकीर रजा की पार्टी आईएमसी से चुनाव भी लड़ चुका है।