जनपद बरेली के नागरिक लंबे समय से शहर के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट एम्स की स्थापना और भूमिगत पार्किंग निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। शहर निवासी वरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना ने बताया कि पिछले 10–15 वर्षों से लगातार मुख्यमंत्री, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को पत्र और मेल भेजकर इन सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक यह प्रस्ताव लाल फीताशाही से बाहर नहीं निकल सका।
बरेली में वर्षों से स्काई वॉक और हाइड्रोलिक पार्किंग जैसे प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन शहर की सबसे बड़ी समस्या सड़क पर खड़े वाहन और पार्किंग संकट आज भी जस की तस बनी हुई है। शहर में एक भी भूमिगत पार्किंग नहीं होने से ट्रैफिक जाम आम बात हो गई है।
वरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना का कहना है कि यदि लखनऊ के हजरतगंज और जनपथ मॉडल पर कुतुबखाना, श्यामगंज और सब्जी मंडी क्षेत्रों में भूमिगत पार्किंग बनाई जाए और उसके ऊपर दुकानें विकसित हों, तो इससे न सिर्फ व्यापारिक गतिविधियों को लाभ मिलेगा, बल्कि शहर का ट्रैफिक भी काफी हद तक सुधर सकता है।
इसके अलावा बरेली में अब तक सरकारी मेडिकल कॉलेज न बनने पर भी उन्होंने चिंता जताई। उनका सुझाव है कि जिला अस्पताल में नया मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बने और राजकीय आयुर्वेद कॉलेज परिसर में भी एक आधुनिक बहुमंजिला चिकित्सा इकाई विकसित की जाए। उनके अनुसार, दोनों स्थानों पर पर्याप्त जमीन उपलब्ध है, लेकिन ठोस विजन और निर्णय की कमी के कारण योजनाएँ आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि बरेली को एम्स और भूमिगत पार्किंग जैसी सौगात मिल जाए, तो यह शहर के स्वास्थ्य ढांचे और यातायात व्यवस्था दोनों को नई दिशा दे सकती है।