सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान, गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी वृंदावन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को नगला रामताल स्थित कृष्ण कुटीर महिला आश्रय सदन के सभागार में सांस्कृतिक और वैचारिक चेतना से ओत-प्रोत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में एक ओर जहां राधा-कृष्ण के दिव्य नृत्यरास ने दर्शकों को भावविभोर किया, वहीं दूसरी ओर महिला सशक्तीकरण की अवधारणा पर गहन विमर्श हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को सहेजते हुए समाज में महिला सशक्तीकरण के वास्तविक स्वरूप को उजागर करना रहा। गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के प्रशिक्षुओं द्वारा प्रस्तुत राधा-कृष्ण नृत्यरास ने सभागार को भक्ति और सौंदर्य से भर दिया। इस भावपूर्ण मंचन में कामिनी ने श्रीकृष्ण की भूमिका निभाकर दर्शकों की विशेष सराहना अर्जित की। नृत्यरास की परिकल्पना एवं निर्देशन गीता शोध संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश खन्ना द्वारा किया गया, जबकि कार्यक्रम का संयोजन कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने किया। संगीत पक्ष को प्रशिक्षक आकाश, नंदीराम, सुनील पाठक और मनमोहन कौशिक ने सशक्त रूप दिया। आयोजन की व्यवस्थाओं में दीपक शर्मा, रितु सिंह, रामवीर सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस अवसर पर आयोजित “भारतीय समाज में महिला सशक्तीकरण की अवधारणा” विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि प्रख्यात फिल्म निर्देशक पं. चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने कृष्ण कुटीर में रह रही निराश्रित वृद्ध माताओं से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने कहा कि वृद्ध महिलाओं की सेवा, सम्मान और सुरक्षा ही महिला सशक्तीकरण का सबसे सशक्त और मानवीय स्वरूप है।
गीता शोध संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश खन्ना ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण भारतीय संस्कृति का मूल तत्व है और नारी सदैव समाज को दिशा देने वाली शक्ति रही है। वहीं सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान के संस्थापक प्रबंधक डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी ने कृष्ण कुटीर में निवासरत माताओं के लिए उपलब्ध कराई जा रही सेवा-सुविधाओं और व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी।