पौष कृष्ण द्वादशी के पावन अवसर पर तद्नुसार मंगलवार, 16 दिसम्बर को श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर धनु संक्रान्ति पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस पुण्य अवसर पर श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान द्वारा आयोजित खिचड़ी महोत्सव का विधिवत शुभारम्भ हुआ, जो संपूर्ण पौष मास तक अनवरत रूप से चलेगा।
सेवा-संस्थान द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार धनु संक्रान्ति के दिन प्रातः काल से ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान श्रीकृष्ण के दर्शनार्थ आए भक्तों को अन्नक्षेत्र प्रांगण में प्रातः 8 बजे से देर सांय तक श्रीठाकुरजी के प्रसाद स्वरूप खिचड़ी-भोग का वितरण किया गया। इस अवसर पर खिचड़ी के साथ-साथ तिल से बनी रेबड़ी, गुड़ की गजक, तिल के लड्डू आदि पारंपरिक प्रसाद भी वृहद मात्रा में श्रद्धालुओं को प्रदान किए गए।
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विभिन्न दालों, मेवों एवं शुद्ध गाय के घी से निर्मित इस दिव्य खिचड़ी-भोग को पाकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। प्रसाद वितरण के दौरान भक्तों के मुख पर अद्भुत संतोष और आस्था की झलक स्पष्ट दिखाई दी। मान्यता है कि धनु संक्रान्ति में श्रीकृष्ण को अर्पित खिचड़ी का विशेष धार्मिक महत्व होता है, जिससे भक्तों को लौकिक एवं आध्यात्मिक दोनों प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती है।
धनु संक्रान्ति पर्व पर गौसेवा का भी विशेष महत्व बताया गया है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर स्थित गौशाला में गायों को सुन्दर व पौष्टिक भोजन कराया गया। गायों को गुड़ का दलिया, गुड़-तिल के लड्डू सहित अन्य आहार अर्पित किए गए, जिससे गौसेवा का पुण्य लाभ प्राप्त किया गया।
शास्त्रीय परंपराओं एवं श्रुतियों में धनु संक्रान्ति के महत्व का विस्तृत वर्णन मिलता है। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के कारण यह पर्व विशेष फलदायी माना जाता है, जो भक्तों को धर्म, भक्ति और समृद्धि की ओर अग्रसर करता है।