जनपद बरेली समेत पूरे उत्तर प्रदेश में शीत लहर ने समय से पहले दस्तक दे दी है, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की व्यवस्था अब भी कैलेंडर के हिसाब से चल रही है। हालात यह हैं कि कई प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के बच्चों के पास मौसम के अनुरूप गर्म कपड़े तक उपलब्ध नहीं हैं। कंपकंपाती ठंड में बच्चों को सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक स्कूल में बैठना पड़ रहा है, जो पूरी तरह अव्यवहारिक और असंवेदनशील व्यवस्था मानी जा रही है।
बेसिक शिक्षा में शीतकालीन अवकाश 31 दिसंबर से प्रस्तावित है, लेकिन इस बार ठंड और शीत लहर पहले ही अपना असर दिखा रही है। कई इलाकों में न्यूनतम तापमान तेजी से गिरा है, जिससे छोटे बच्चों की सेहत पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। हालात और भी गंभीर तब हो जाते हैं जब स्कूलों में पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं। कई विद्यालयों में बच्चों को फर्श पर दरी या पट्टी बिछाकर बैठाया जाता है, जो इस मौसम में सर्दी, खांसी, बुखार और निमोनिया जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है।
वरिष्ठ शिक्षक नेता हरीश बाबू शर्मा ने कड़ाके की ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन से छात्रहित में तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 8 तक) के बच्चे बेहद संवेदनशील होते हैं। ऐसे में शीत लहर के दौरान उन्हें स्कूल बुलाना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
शिक्षक संगठनों और अभिभावकों की भी यही राय है कि जब तक मौसम सामान्य नहीं हो जाता, तब तक विद्यालयों की टाइमिंग में बदलाव किया जाए या फिर कक्षा 8 तक के बच्चों के लिए अवकाश घोषित किया जाए। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और डीएम अंकल पर टिकी हैं कि वे हालात को समझते हुए बच्चों के हित में राहत का फैसला कब लेते हैं।