Friday, January 30, 2026

KASGANJ NEWS मौसम में अचानक बदलाव से आलू की फसल पर खतरा, पछेती झुलसा रोग को लेकर कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

लेखक: Guddu Yadav | Category: उत्तर प्रदेश | Published: December 19, 2025

KASGANJ NEWS मौसम में अचानक बदलाव से आलू की फसल पर खतरा, पछेती झुलसा रोग को लेकर कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी


 जागरण टुडे, कासगंज।

जनपद में 18 दिसंबर 2025 से मौसम ने एकाएक करवट बदल ली है। तापमान में अचानक गिरावट के साथ-साथ वायुमंडल में आद्रता भी काफी बढ़ गई है। यह स्थिति आलू, दलहनी एवं तिलहनी फसलों के लिए अनुकूल नहीं मानी जा रही है। विशेषकर आलू की फसल में इस मौसम के चलते पछेती झुलसा (लेट ब्लाइट) रोग के प्रकोप की प्रबल संभावना बन गई है।


कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जब तापमान 10 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है और वायुमंडल की आद्रता 80 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तब आलू की फसल में पछेती झुलसा रोग तेजी से फैलता है। यह एक फफूंदजनित भयानक बीमारी है, जो सबसे पहले पत्तियों के किनारों से शुरू होकर धीरे-धीरे पूरे पौधे में फैल जाती है। इस रोग का प्रभाव आलू की पत्तियों, तनों और कंदों पर भी देखा जाता है। रोग की प्रारंभिक अवस्था में पत्तियों के किनारों पर पानी जैसे धब्बे दिखाई देते हैं, जो ठंडे और नम मौसम में तेजी से बढ़ते हैं।


जिला कृषि अधिकारी एवं जिला कृषि रक्षा अधिकारी डा. अवधेश मिश्र ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। रोग की रोकथाम के लिए जैविक प्रबंधन के अंतर्गत स्यूडोमोनास फ्लोरीसेंस की 5 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में अथवा बैसिलस सबटिलिस आधारित बायो-फंजीसाइड्स की 3 से 4 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।


वहीं रासायनिक प्रबंधन के लिए मैंन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लू.पी. की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करने की सिफारिश की गई है। यदि फसल में पछेती झुलसा के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगें, तो मेटालेक्सिल 4% + मैंन्कोजेब 64% डब्लू.पी. की 2-2 ग्राम मात्रा या सायमोक्सानिल 8% + मैंन्कोजेब 64% डब्लू.पी. की 2.5-2.5 ग्राम मात्रा अथवा फ्लूओपिकोलाइड + प्रोपामोकार्ब की 2-2 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।


कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे सुबह और शाम नियमित रूप से फसल की निगरानी करें। साथ ही, ऐसे मौसम में आलू की फसल में उचित नमी बनाए रखना जरूरी है, इसलिए आवश्यकता पड़ने पर बहुत हल्की सिंचाई अवश्य करें।

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