26 सितंबर को शहर में हुए बवाल के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आईएमसी मुखिया मौलाना तौकीर के बेहद करीबी माने जाने वाले नफीस और उसके बेटे फरहान रजा को बड़ा झटका दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश अमृता शुक्ला ने नफीस, फरहान रजा सहित कई आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। अदालत के इस फैसले से साफ है कि बवाल के आरोपियों को राहत देने के मूड में न्यायपालिका नहीं है।
थाना कोतवाली में दर्ज मुकदमों में नफीस, उसका पुत्र फरहान रजा, इदरीश, इकबाल, अनीस सकलैनी और नदीम सकलैनी उर्फ अनीस सकलैनी की जमानत अर्जियों पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की भूमिका को गंभीर बताते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया। दलीलों से सहमत होते हुए अदालत ने सभी की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
इतना ही नहीं, नदीम सकलैनी के खिलाफ थाना बारादरी में दर्ज एक अन्य मामले में भी अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया। इससे यह संकेत गया है कि बरेली बवाल में जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध और प्रभावशाली मानी जा रही है, उनके प्रति अदालत किसी तरह की नरमी बरतने को तैयार नहीं है।
हालांकि, सभी आरोपियों को झटका ही नहीं लगा। कोतवाली थाने में दर्ज एक अलग मुकदमे में आरोपी आरिफ की जमानत अर्जी अदालत ने स्वीकार कर ली। वहीं कैंट थाने में दर्ज मुकदमे में मोहम्मद साजिद उर्फ साजिद सकलैनी को भी अदालत से राहत मिल गई।
गौरतलब है कि 26 सितंबर को हुए बवाल ने बरेली की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। हिंसा, उपद्रव और तनाव के बाद पुलिस ने कई नामजद और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे। मामले में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी काफी चर्चा रही, खासतौर पर मौलाना तौकीर के करीबी बताए जा रहे लोगों की गिरफ्तारी के बाद।
अदालत के इस फैसले को बवाल के मामलों में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जिससे साफ संदेश गया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को आसानी से राहत नहीं मिलेगी।