बांग्लादेश में हिंदुओं, सिखों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और असुरक्षा के विरोध में मूसाझाग क्षेत्र के मनिकापुर कौर में एक शांतिपूर्ण लेकिन सशक्त विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में व्याप्त अनिश्चितता, अराजकता और कथित कानून-विहीनता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मौजूदा हालात में कट्टरपंथी और उग्रवादी तत्व अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं, जिससे भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
वक्ताओं ने कहा कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि पूरे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते व्यवस्थित उत्पीड़न का चिंताजनक संकेत है। प्रदर्शन के दौरान मांग की गई कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दी जाने वाली मान्यताओं पर पुनर्विचार किया जाए। इसी क्रम में मोहम्मद यूनुस को प्रदान किए गए नोबेल शांति पुरस्कार को तत्काल वापस लेने की मांग भी उठी, यह तर्क देते हुए कि जो नेतृत्व कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में असफल रहता है, उसे नैतिक वैधता नहीं मिलनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक मीडिया से इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ने और प्रभावी हस्तक्षेप की अपील की। साथ ही भारत सरकार से आग्रह किया गया कि वह कूटनीतिक, राजनीतिक और मानवीय स्तर पर सभी संभव उपाय कर बांग्लादेश में हिंदुओं व अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित कराने की दिशा में पहल करे। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश की जनता शांति, मानवाधिकारों और निर्बाध आर्थिक प्रगति की हकदार है।
इस अवसर पर मोहन बजरंगी, राम खिलाड़ी (प्रधान), मुनीश शाक्य (बीडीसी), गुड्डू मौर्य, अशोक पाल शाक्य, चंद्रपाल शर्मा, अनिल शाक्य, यश पाल शाक्य, अनुपम शाक्य, शिवम शर्मा, सतेंद्र वर्मा, प्रेम पाल गुप्ता, पुत्तूलाल कश्यप, हाकीम वर्मा, अजय वीर शाक्य, अरविंद शाक्य, राहुल कश्यप, मुनीश कश्यप, संत राम कश्यप, संजीव शाक्य, ब्रजेश शाक्य, रजनीश गुप्ता और चैतन्य कुमार सहित कई लोग उपस्थित रहे।