राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा निरंतर चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला में श्रीजीबाबा स्कूल परिसर में प्राथमिक वर्ग का शुभारंभ हुआ। इस वर्ग का उद्देश्य स्वयंसेवकों के सर्वांगीण विकास के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दिशा में मजबूत आधार तैयार करना है। उद्घाटन सत्र में प्रांत सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख संतोष जी ने कहा कि संघ का मूल मंत्र “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण” है और इसी लक्ष्य को लेकर ऐसे प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाते हैं।
संतोष जी ने कहा कि इन वर्गों के माध्यम से स्वयंसेवकों में अनुशासन, सांस्कृतिक चेतना, देशभक्ति, सेवा भावना और सामाजिक दायित्व का विकास किया जाता है। संघ चाहता है कि प्रशिक्षित स्वयंसेवक समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बनें और मजबूत, संगठित व आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व और भारतीय संस्कृति के मूल्यों पर आधारित समाज ही राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
वर्ग में स्वयंसेवकों को कठिन दिनचर्या के बीच शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें न केवल शारीरिक रूप से सक्षम बनाना है, बल्कि नैतिक, बौद्धिक और सामाजिक रूप से भी जागरूक करना है, ताकि वे समाज की कुरीतियों को दूर करने में योगदान दे सकें। इस वर्ग में मथुरा महानगर के सभी दस नगरों से कुल 72 शिक्षार्थी भाग ले रहे हैं, जिनकी आयु 14 से 38 वर्ष के बीच है।
वर्ग कार्यवाह मनोज ने बताया कि यह प्रशिक्षण एक तपस्या के समान है। जब शिक्षार्थी इस तपस्या से गुजरकर बाहर निकलता है, तो उसके आचरण और व्यवहार से समाज में स्वतः ही श्रद्धा उत्पन्न होती है। वर्ग की दिनचर्या अत्यंत अनुशासित है, जिसमें स्वयंसेवक सुबह 5 बजे जागने से लेकर रात 10 बजे तक शाखाओं, शारीरिक अभ्यास और बौद्धिक सत्रों में भाग लेते हैं।
वर्ग का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। वर्ग की व्यवस्थाओं में महानगर प्रचारक सचिन जी, विद्यार्थी प्रचारक अजय, भाग प्रचारक रोहिताश, वर्ग पालक श्रीओम, बौद्धिक प्रमुख संजय और पवन, शारीरिक प्रमुख दुर्गा प्रसाद सहित अन्य कार्यकर्ता सक्रिय रूप से जुटे हैं। वर्ग के मुख्य शिक्षक कौशलेश हैं।