राजीव भवन सभागार में गुरुवार को वीर बाल दिवस का भव्य और प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को भारतीय इतिहास के महान बलिदानों से जोड़ते हुए उनमें साहस, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रप्रेम की भावना का संचार करना रहा। यह दिवस सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों—बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह—के अदम्य साहस एवं सर्वोच्च बलिदान की स्मृति में मनाया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य विकास अधिकारी, मथुरा उपस्थित रहे। उनके साथ जिला प्रोबेशन अधिकारी, मथुरा, बाल विकास परियोजना अधिकारी, आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां तथा महिला कल्याण विभाग का समस्त स्टाफ मौजूद रहा। उपस्थित अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि वीर बाल दिवस केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। बच्चों का सर्वांगीण विकास, संस्कार और साहस ही किसी भी राष्ट्र की मजबूत नींव होते हैं।
वीर बाल दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा 23 बालक-बालिकाओं को सम्मानित किया गया। उन्हें प्रमाण पत्र, शैक्षिक किट और उपयोगी उपहार प्रदान किए गए। इस सम्मान समारोह का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करना और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना रहा।
कार्यक्रम के दौरान महिला कल्याण विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा वर्तमान में संचालित “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही विभाग द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड/सामान्य) सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं के बारे में प्रतिभागियों को जागरूक किया गया। उपस्थित सभी लोगों को बाल विवाह मुक्त भारत की शपथ भी दिलाई गई।
कार्यक्रम के समापन पर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए शैक्षणिक सामग्री, स्टेशनरी और स्मृति चिह्न वितरित किए गए, जिससे बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और आत्मविश्वास झलकता नजर आया।