गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान की स्मृति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने वीर बाल दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया। इस अवसर पर संघ के स्वयंसेवकों ने गुरुद्वारों में पहुंचकर गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका और गुरुवाणी श्रवण कर वीर साहिबजादों को नमन किया।
सुबह नियमित शाखा संपन्न करने के पश्चात संघ के स्वयंसेवक टोली बनाकर जवाहर हाट स्थित गुरुद्वारे पहुंचे। यहां उन्होंने गुरुवाणी के पावन पाठ को ध्यानपूर्वक सुना। इसके उपरांत संघ की शाखाओं में गुरु गोविंद सिंह जी के शौर्य और बलिदान को समर्पित गीत “पिता वारिया ते लाल चारों वारे…” को पूरे जोश और उत्साह के साथ गाया। गीत के दौरान गुरुद्वारे की संगत ने भी अपने वाद्ययंत्रों के साथ सहभागिता की, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
गुरुद्वारा संगत प्रमुख सरदार कुलदीप सिंह ने स्वयंसेवकों के इस भावपूर्ण आयोजन की सराहना करते हुए उन्हें सायंकाल आयोजित विशेष लंगर में आमंत्रित किया। लंगर सेवा के माध्यम से भी वीर बाल दिवस की भावना को और सुदृढ़ किया गया।
इस अवसर पर संघ के प्रांत कार्यवाह राजकुमार ने गुरु गोविंद सिंह जी एवं चारों साहिबजादों के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी के पिता से लेकर उनके पुत्रों तक ने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने सिख समाज को हिंदू समाज की रक्षा की अग्रिम पंक्ति में खड़ा बताते हुए दोनों समाजों के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया।
इसके साथ ही नानक बगीची गुरुद्वारा, मसानी पर भी स्वयंसेवकों ने दसों गुरुओं का स्मरण करते हुए शहीद दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए। गुरुद्वारा प्रधान सरदार गुरचरण सिंह ने कहा कि छोटे साहिबजादों को दिए गए कष्टों की स्मृति में संपूर्ण सिख समाज इस दिवस को शोक और गर्व के साथ मनाता है।
कार्यक्रम में संघचालक लक्ष्मीनारायण कक्कड़, डॉ. संजय, केके कैनेडिया, गुरुद्वारा सचिव हरविंदर सिंह, प्रदीप बीएसएनएल, अजय सर्राफ, योगेश आवा, भूषण जुनेजा, जगदीश आहूजा, राकेश, गौरव जैन सहित अनेक स्वयंसेवक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।