न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 2.0 की शुरुआत कर दी गई है। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के माध्यम से अवगत कराया गया कि यह अभियान 02 जनवरी 2026 से 31 जनवरी 2026 तक पूरे देश में चलाया जा रहा है। अभियान का संचालन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा मीडियेशन एवं कंसीलियेशन प्रोजेक्ट कमेटी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के तत्वावधान में किया जा रहा है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मध्यस्थता के माध्यम से न्यायालयों में वर्षों से लंबित मामलों का तेजी से, कम खर्च में और आपसी सहमति से समाधान कराना है। अभियान के अंतर्गत वैवाहिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस, वाणिज्यिक एवं सेवा विवाद, शमनीय आपराधिक मामले, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली, संपत्ति बंटवारा, बेदखली, भूमि अधिग्रहण सहित अन्य उपयुक्त दीवानी मामलों का निस्तारण सुलह-समझौते के आधार पर किया जाएगा।
मध्यस्थता अभियान के अंतर्गत वे पक्षकार जो अपने लंबित मामलों का आपसी सहमति से समाधान चाहते हैं, वे अपने प्रकरण को मध्यस्थता केंद्र, जनपद न्यायालय, मथुरा में भेजे जाने हेतु संबंधित न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रशिक्षित मध्यस्थों की सहायता से पक्षकारों के बीच संवाद स्थापित कर विवाद का समाधान कराया जाएगा।
यह अभियान न केवल न्यायिक बोझ को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि आम नागरिकों को न्याय तक सरल, त्वरित और सम्मानजनक पहुंच प्रदान करने का सशक्त माध्यम भी है। प्रशासन ने अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान का लाभ उठाने की अपील की है।