संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और जनसाधारण को संस्कृत से जोड़ने के उद्देश्य से संस्कृत भारती, मथुरा जनपद द्वारा एक दिवसीय संस्कृत भाषा प्रवेशवर्ग का आयोजन वैदिक विधि-विधान के साथ संस्कृत भारती ब्रजप्रांत कार्यालय, केशव भवन, सरस्वती कुंड पर संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण वर्ग में मथुरा जनपद के विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े 78 प्रशिक्षणार्थियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर आचार्य मुरलीधर चतुर्वेदी ने वैदिक स्वस्तिवाचन किया तथा हरस्वरूप यादव ने संस्कृत ध्येय मंत्र का पाठ कराया। प्रवेशवर्ग का आयोजन प्रातः 09 बजे से सायं 04 बजे तक चार सत्रों में किया गया। प्रशिक्षण का नेतृत्व ब्रजप्रांत प्रशिक्षण प्रमुख आचार्य सतीश शर्मा ने किया। उनके साथ विभाग संयोजक श्यामसुंदर शर्मा, प्रधानाचार्य डॉ. संजय शर्मा, शिक्षिका कोमल वर्मा, आरती राजपूत सहित अन्य प्रशिक्षकों ने संस्कृत भाषा का प्रारंभिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
समापन सत्र में संस्कृत भारती के न्यास सचिव गंगाधर अरोड़ा, पत्राचार पाठ्यक्रम प्रमुख गणेश शंकर पाण्डेय, प्रचार प्रमुख रामदास चतुर्वेदी शास्त्री, संदीप चौधरी, कीर्ति शर्मा एवं प्रियंका शर्मा ने विचार व्यक्त करते हुए संस्कृत को विश्व की सबसे प्राचीन और सभी भाषाओं की जननी बताया। मुख्य वक्ता संस्कृत भारती ब्रजप्रांत मंत्री धर्मेन्द्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि संस्कृत भाषा को जनसाधारण की भाषा बनाने और जनपद में इसके प्रचार-प्रसार को गति देने के उद्देश्य से इस प्रवेशवर्ग का आयोजन किया गया है।
समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए मथुरा जनपद अध्यक्ष आचार्य ब्रजेन्द्र नागर ने सभी पदाधिकारियों एवं प्रशिक्षणार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा अब केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व के अनेक देशों में इसे ज्ञान और विज्ञान की भाषा के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, जिससे इसका भविष्य उज्ज्वल है। संचालन मथुरा जनपद मंत्री डॉ. संजय शर्मा ने किया।