बरेली जनपद के मीरगंज क्षेत्र की रहने वाली एक मुस्लिम युवती ने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म अपनाकर अपने प्रेमी से विवाह कर लिया। विवाह से पूर्व युवती ने शुद्धिकरण की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की, जिसके बाद उसका नाम आशिया से बदलकर अंशिका रखा गया।
शुक्रवार को अंशिका ने अपने प्रेमी मोनू के साथ मढ़ीनाथ स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। यह विवाह पंडित के.के. शंखधार द्वारा विधि-विधान से संपन्न कराया गया।
जानकारी के अनुसार, दोनों की पहली मुलाकात करीब पांच वर्ष पूर्व एक स्थानीय मेले में हुई थी। बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और धीरे-धीरे यह दोस्ती प्रेम में बदल गई। युवती ने बताया कि उसकी बहन का विवाह मोनू के गांव पीपलसाना (भोजीपुरा) में हुआ है, जिसके चलते उसका वहां आना-जाना था।
अंशिका का कहना है कि जब उसने अपने परिजनों को इस संबंध के बारे में जानकारी दी तो धर्म अलग होने का हवाला देकर विरोध किया गया और उसे जान से मारने की धमकियां भी मिलीं। इन परिस्थितियों को देखते हुए उसने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन कर विवाह करने का निर्णय लिया।
अगस्त्य मुनि आश्रम में संपन्न विवाह के दौरान मोनू ने अंशिका की मांग में सिंदूर भरा, मंगलसूत्र पहनाया और अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। इसके बाद अंशिका ने सनातन परंपरा के अनुसार बिछिया सहित अन्य सुहाग चिन्ह धारण किए। इस अवसर पर आश्रम परिसर में सीमित संख्या में लोग मौजूद रहे।
पंडित के.के. शंखधार ने बताया कि युवती बालिग है और उसने पूरी तरह स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया है। सभी धार्मिक अनुष्ठान विधिवत रूप से संपन्न कराए गए।
विवाह के पश्चात अंशिका ने जिलाधिकारी को शपथ पत्र सौंपते हुए अपने परिजनों से जान का खतरा बताया और सुरक्षा की मांग की। उसने स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन और विवाह का निर्णय उसने पूरी तरह अपनी स्वतंत्र इच्छा से लिया है।