नए वर्ष की शुरुआत के साथ ही क्षय रोग उन्मूलन की दिशा में मथुरा में एक प्रेरक पहल देखने को मिली। Mundona रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन ने जिले के बरसाना, गोवर्धन, बलदेव और फरह ब्लॉकों में उपचार करा रहे क्षय रोगियों के लिए पोषण सहयोग कार्यक्रम आयोजित किया। इस अभियान के तहत 550 से अधिक टीबी मरीजों को पौष्टिक खाद्य सामग्री प्रदान की गई, जिससे उनके इलाज को मजबूती और शरीर को आवश्यक ऊर्जा मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान एक अभिनव पहल के रूप में क्षय रोगियों के लिए विशेष रूप से तैयार पहचान पत्र युक्त कैलेंडर का लोकार्पण किया गया। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संजीव यादव ने इस कैलेंडर का विमोचन करते हुए बताया कि यह साधारण कैलेंडर नहीं, बल्कि मरीज के उपचार की निगरानी का प्रभावी माध्यम है। इसके माध्यम से रोगी रोजाना दवा सेवन, वजन में बदलाव, पारिवारिक सदस्यों की जांच स्थिति और अन्य जरूरी स्वास्थ्य जानकारियां दर्ज कर सकेगा।
डॉ. संजीव यादव ने कहा कि इस व्यवस्था से इलाज की नियमितता बनी रहेगी और मरीज स्वयं अपनी प्रगति को समझ पाएगा। इससे दवा छोड़ने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा और उपचार की सफलता दर बढ़ेगी। उन्होंने यह भी बताया कि मरीजों की सक्रिय भागीदारी टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाती है।
कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सा विशेषज्ञों ने रोगियों को संतुलित आहार, समय पर दवा और सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया। चिकित्सा अधीक्षक बलदेव डॉ. बिजेंद्र सिसोदिया और फरह के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रामवीर सिंह ने कहा कि टीबी केवल दवाओं से नहीं, बल्कि अनुशासित जीवनशैली और मानसिक मजबूती से भी हराई जा सकती है। इस अवसर पर मरीजों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की शपथ दिलाई गई, वहीं परिजनों से भी उपचार अवधि में पूरा सहयोग देने का आह्वान किया गया।
संस्था की ओर से डॉ. लक्ष्मीकांत गौर ने बताया कि यह पहल सिर्फ खाद्य सामग्री बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों के भीतर आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना जगाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब रोगी मानसिक रूप से मजबूत होता है, तो इलाज के परिणाम भी बेहतर होते हैं।
कार्यक्रम के आयोजन में जिला पीएमडीटी समन्वयक नवल किशोर सहित स्वास्थ्य विभाग और संस्था के अनेक कर्मियों का योगदान रहा। बड़ी संख्या में चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी और स्वयंसेवक मौजूद रहे। यह कार्यक्रम मथुरा में टीबी उन्मूलन के लिए पोषण, जागरूकता और सामूहिक सहभागिता का मजबूत उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने नए वर्ष को उम्मीद और स्वास्थ्य का संदेश दिया।