काम के अधिकार को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने सेठबाड़ा स्थित पार्टी कार्यालय पर प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। “मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत आयोजित इस प्रेस वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश धनगर ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों के लिए जीवनरेखा है, जिसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
मुकेश धनगर ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया था। यह देश का एकमात्र ऐसा कानून है, जो ग्रामीण परिवारों को मजदूरी रोजगार मांगने का कानूनी अधिकार देता है। कानून के तहत 15 दिनों के भीतर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का स्पष्ट प्रावधान है, जो मनरेगा को अन्य योजनाओं से अलग बनाता है।
उन्होंने बताया कि मनरेगा हर साल 5 से 6 करोड़ ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराता है। यह योजना न केवल मजबूरी में होने वाले पलायन को रोकती है, बल्कि ग्रामीण मजदूरी को स्थिर करती है और गांवों में स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण भी करती है। विशेष रूप से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और वंचित वर्गों को इससे बड़ा लाभ मिला है। कुल कार्यदिवसों में महिलाओं की भागीदारी लगभग 60 प्रतिशत तक है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि नया VB-GRAM-G अधिनियम मनरेगा की मूल भावना पर सीधा प्रहार है। यह काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है और निर्णय प्रक्रिया को केंद्र सरकार के हाथों में सीमित कर देता है। इससे ग्राम सभा और पंचायतों की भूमिका कमजोर होगी। साथ ही केंद्र का मजदूरी योगदान लगभग 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे आर्थिक बोझ राज्यों और श्रमिकों पर पड़ेगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि सीमित बजट आवंटन, कृषि के व्यस्त मौसम में कार्य पर रोक और मजदूरी सुरक्षा प्रावधानों में कटौती से रोजगार के अवसर घटेंगे और ग्रामीण संकट और गहराएगा। कांग्रेस ने ऐलान किया कि मनरेगा और काम के अधिकार की रक्षा के लिए यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।